आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य संकलन- ‘PoemHunter.com’ से लेता हूँ। लीजिए पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया उनकी कविता ‘Why Did He Choose’ का भावानुवाद-

गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता 

उसने यह निर्णय क्यों लिया?

 

मेरे द्वार पर आने का निर्णय क्यों लिया,
उस भटकते युवक ने, जबकि दिन ढल चुका था?

जब भी मैं भीतर-बाहर, आते-जाते उसके पास से गुजरती हूँ,
मेरी निगाहें उसके चेहरे पर जाकर रुक जाती हैं।

मैं समझ नहीं पाती, कि क्या मुझे उससे यह बात करनी चाहिए,
या शांत रह जाना चाहिए, कि क्यों उसने मेरे द्वार पर
आने का निर्णय लिया?

जुलाई माह में बादलों से भरी रातें अंधेरी हैं;
शरद ऋतु में आकाश हल्का नीला-नीला रहता है;
और वसंत के दिनों में दक्षिणी हवाओं के कारण
बेचैनी रहती है।

वह हर बार नई धुनों के साथ अपने गीत तैयार करता है।
मैं अपने काम से ध्यान हटाकर देखती हूँ, और मेरी आंखों में
नमी आ जाती है। क्यों निर्णय लिया उसने
मेरे द्वार पर आने का?

                                                                                     -रवींद्रनाथ ठाकुर

 

और अब वह अंग्रेजी कविता, जिसके आधार मैं भावानुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ-

Why Did He Choose

Why did he choose to come to my
door, the wandering youth, when the
day dawned?

As I come in and out I pass by him
every time, and my eyes are caught by
his face.

I know not if I should speak to him
or keep silent. Why did he choose to
come to my door?

The cloudy nights in July are dark;
the sky is soft blue in the autumn; the
spring days are restless with the south
wind.

He weaves his songs with fresh
tunes every time.

I turn from my work and my eyes
fill with the mist. Why did he choose
to come to my door?

-Rabindranath Tagore

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार।