आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य संकलन- ‘PoemHunter.com’ से लेता हूँ। लीजिए पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया उनकी कविता ‘Speak To Me My Love’ का भावानुवाद-

गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता

मुझसे बात करो मेरे प्रिय

मुझसे बात करो, मेरे प्यारे! मुझे बताओ शब्दों में, जो कुछ भी  तुमने गाया था।
रात अंधेरी है, सितारे-
बादलों के आंचल में छिप गए हैं। हवा आह भर रही है
पत्तों के बीच से।

मैं अपने केश खुले छोड़ दूंगी, मेरा नीला
लबादा, मेरे चारों ओर लिपटा रहेगा, रात की तरह,
मैं तुम्हारे सिर को अपने सीने पर चिपका लूंगी; और
मधुर एकांत में तुम्हारे हृदय
की धड़कन को भी, मैं अपनी आंखें बंद करूंगी
और सुनूंगी। मैं तुम्हारे चेहरे की तरफ नहीं देखूंगी।

जब तुम्हारे शब्द समाप्त हो जाएंगे, तब हम
शांत और स्थिर होकर बैठ जाएंगे। केवल वृक्ष
अंधकार में फुसफुसाएंगे।

रात फीकी होती जाएगी, पौ फट जाएगी।
हम एक-दूसरे की आंखों में देखेंगे, और फिर
और अलग-अलग रास्तों पर चले जाएंगे।

मुझसे बोलो, मेरे प्यारे! मुझे शब्दों में
बताओ, कि तुमने क्या गाया था।

-रवींद्रनाथ ठाकुर

और अब वह अंग्रेजी कविता, जिसके आधार मैं भावानुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ-

Speak To Me My Love

Speak to me, my love! Tell me in
words what you sang.
The night is dark. The stars are
lost in clouds. The wind is sighing
through the leaves.

I will let loose my hair. My blue
cloak will cling round me like night. I
will clasp your head to my bosom; and
there in the sweet loneliness murmur
on your heart. I will shut my eyes
and listen. I will not look in your face.

When your words are ended, we will
sit still and silent. Only the trees will
whisper in the dark.

The night will pale. The day will
dawn. We shall look at each other’s
eyes and go on our different paths.

Speak to me, my love! Tell me in
words what you sang.

Rabindranath Tagore

 

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार।

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