आज मैं 1972 में रिलीज़ हुई मनोज कुमार जी की फिल्म – शोर का एक प्रसिद्ध गीत शेयर करना चाहता हूँ जिसे मुकेश जी और लता मंगेशकर जी ने गाया है। श्री संतोषानंद जी के लिखे इस गीत का संगीत लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल जी की अमर जोड़ी ने दिया था।

 

अपने प्रिय गायक मुकेश जी के बारे में तो मैं बात करता ही रहता हूँ और लता जी के बारे में मैं क्या विशेष बता सकता हूँ। आज इस गीत के लेखक- संतोषानंद जी के बारे में बात करना चाहता हूँ।

मैं बहुत पहले से दिल्ली में कवि सम्मेलनों और कवि गोष्ठियों का आनंद लेता रहा हूँ। लाल किले पर पहले बहुत प्रसिद्ध कवि सम्मेलन हुआ करता था, राष्ट्रीय आयोजन के रूप में शायद 26 जनवरी के आसपास। स्व. गोपालप्रसाद व्यास जी, जो उस समय हिंदी साहित्य सम्मेलन के सर्वेसर्वा हुआ करते थे, वे इस आयोजन को कराते थे और इसमें देश के बड़े-बड़े कवि भाग लेते थे, जिनमें दिनकर जी, बच्चन जी, नीरज जी, बैरागी जी आदि-आदि श्रेष्ठतम कवि शामिल थे।

इसी आयोजन में व्यास जी जब संतोषानंद जी को आवाज लगाते थे, अक्सर वो मंच से दूर होते थे, वे दौड़कर आते और व्यास जी के चरणों में गिर जाते थे, और व्यास जी बोलते थे चल बेटा सुना दे कविता, और संतोषानंद ‘जी गुरुदेव’ कहकर कविता पाठ प्रारंभ करते थे।

संतोषानंद जी उस समय भी कविता के रूप में जो पढ़ते थे, उस पर तालियां तो खूब बजती थीं, ‘मेरे देश को बचा लो, मेरे प्राण ले लो रे’, ‘ओ मेरे देशवासी कुछ काम कर लो, थोड़ी सी ये ज़िंदगी है नाम कर लो’। कुल मिलाकर वे कवि-सम्मेलन मंच के गुलशन नंदा थे। कवि लोग उनको गंभीरता से नहीं लेते थे। हम लोग उस समय दिल्ली पब्लिक लायब्रेरी में कवि गोष्ठी किया करते थे, उसमें भी वे एक-दो बार आए थे।

समय बीता और संतोषानंद जी को फिल्मों में भी कुछ गीत लिखने को मिल गए और मानना पड़ेगा कि ये कुछ गीत भी बहुत सुंदर बन पड़े हैं, जिनमें आज का यह गीत भी शामिल है।

मुझे याद है कि लंबे समय के बाद जब संतोषानंद जी फिल्मों में भी कुछ गीत लिख चुके थे, तब मैंने उनको एक कवि सम्मेलन में बुलाया, तब उसमें भी अन्य, अपने को साहित्यिक मानने वाले उन पर ज्यादा ध्यान नहीं दे रहे थे, तब संतोषानंद बोले थे कि ‘ये सब लोग मुझसे जलते हैं, कि मुझे फिल्मों में गीत लिखने का मौका मिला और वो हिट भी हो गए।

खैर ये सब बातें छोड़कर आइए यह प्यारा सा गीत गुनगुनाइए-

एक प्यार का नगमा है, मौजों की रवानी है,
ज़िंदगी और कुछ भी नहीं, तेरी मेरी कहानी है।

कुछ पाकर खोना है, कुछ खोकर पाना है,
जीवन का मतलब तो, आना और जाना है,
दो पल के जीवन से, इक उम्र चुरानी है,
ज़िंदगी और कुछ भी नहीं, तेरी मेरी कहानी है।

तू धार है नदिया की, मैं तेरा किनारा हूँ,
तू मेरा सहारा है, मैं तेरा सहारा हूँ,
आँखों में समंदर है, आशाओं का पानी है।
ज़िंदगी और कुछ भी नहीं, तेरी मेरी कहानी है।

तूफ़ान को आना है, आ कर चले जाना है,
बादल है ये कुछ पल का, छा कर ढल जाना है,
परछाइयाँ रह जाती, रह जाती निशानी है।
ज़िंदगी और कुछ भी नहीं, तेरी मेरी कहानी है

तुम साथ न दो मेरा, चलना मुझे आता है,
हर आग से वाक़िफ हूँ, जलना मुझे आता है,
तदबीर के हाथों से, तक़दीर बनानी है।
ज़िंदगी और कुछ भी नहीं तेरी मेरी कहानी है।

 

आज के लिए इतना ही।
नमस्कार।

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