अपने लंदन में होने की खबर तो मैंने कल दे दी थी। अब एक फर्क़ तो ये पड़ेगा कि मेरा ब्लॉग का आलेख पोस्ट करने का टाइम बदल जाएगा। जैसे मैं यहाँ देर रात में पोस्ट करूंगा तो वो चिट्ठी भारत में ब्रह्म-मुहूर्त में खुलेगी। जब कुछ नया देखूंगा तो वह पोस्ट यात्रा-ब्लॉग का रूप ले लेगी अन्यथा सामान्य पोस्ट करता रहूंगा।

एक फर्क़ ये पड़ेगा इन दिनों कि मेरा वॉक करने का इलाका अंग्रेजों वाला हो जाएगा। कल कैनेरी व्हार्फ रिवर फ्रंट के बारे में बताया था, जिसकी प्रेरणा अंग्रेजों ने माननीय अखिलेश यादव जी द्वारा विकसित लखनऊ के रिवर फ्रंट से ली थी (मज़ाक है जी!)। काफी सुंदर रिवर फ्रंट है, वैसे ऐसे सुंदर रिवर फ्रंट, दिल्ली में यमुना नदी पर, अहमदाबाद में भी बहुत सुंदर रिवर फ्रंट है और शारजाह में भी कॉर्निश के नाम से जाना जाता है, जहाँ शाम को रंगीन फव्वारों में अनेक दृश्य दिखाए जाते हैं।


हाँ तो वर्ष 2000 तक मुझे लखनऊ के रिवर फ्रंट क्षेत्र में घूमने का अवसर मिलता था, यद्यपि वह बाद में ज्यादा विकसित हुआ। 2010 के बाद कुछ वर्षों तक गुड़गांव में और पिछले 2-3 वर्ष से गोवा में मीरामार बीच वाले क्षेत्र में इवनिंग वॉक का आनंद लेता रहा हूँ, इन दिनों वहाँ बारिश में काफी फिसलन हो गई है, सो मैं वॉक करने के लिए लंदन आ गया जी, ठीक है ना!

आज भी मैं कैनरी व्हार्फ स्टेशन और रिवर फ्रंट के कुछ चित्र शेयर कर रहा हूँ।

एक बात मैंने अपनी पिछले वर्ष की यात्रा के समय लिखी थी कि लंदन में आपको लोग वाद्य बजाते, गाना गाते दिख जाते हैं और आप उनको ईनाम दे सकते हैं लेकिन भीख मांगते नहीं दिखते। इस बार मुझे इसमें सुधार करना पड़ेगा, यहाँ हमारे घर के पास ही, कैनरी व्हार्फ स्टेशन जाने के लिए करीब 100 मीटर का हैंगिंग ब्रिज जैसा है, उस पर तीन भिखारी मैंने देखे। यह तो मानना पड़ेगा कि यह प्रोफेशन शायद भारत से ही एक्सपोर्ट हुआ होगा!

आज बस फिर से इस क्षेत्र कैनरी व्हार्फ स्टेशन और रिवर फ्रंट के कुछ चित्र शेयर कर रहा हूँ। मैं ज्यादा चित्र शेयर नहीं कर पाता, पता नहीं क्या तकनीकी समस्या है।

आज के लिए इतना ही।
नमस्कार।

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