आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य संकलन- ‘PoemHunter.com’ से लेता हूँ। लीजिए पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया उनकी कविता ‘It Is Written In The Book’ का भावानुवाद-

गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता

यह लिखा है पुस्तक में!

यह लिखा है पुस्तक में, कि मनुष्य जब पचास वर्ष का हो जाए,
तब उसे शोर-शराबे वाली दुनिया छोड़नी चाहिए,
और वन में एकांतवास के लिए जाना चाहिए.
लेकिन कवि यह दावा करता है कि
वन का आश्रय, केवल युवाओं के लिए है,
क्योंकि यह है-
जन्मस्थान पुष्पों का और यहाँ बसेरा है पक्षियों और मधुमक्खियों का;
और यहाँ छुपा चारा प्रतीक्षा करता है, प्रेमियों की फुसफुसाहट के रोमांच का।

वहाँ फैली चांदनी, मालती पुष्पों के लिए चुंबन की तरह है,
जिसमें गहरा संदेश निहित है, परंतु जो उसको समझ सकते हैं, उनकी उम्र पचास से बहुत कम है।
परंतु अफसोस, कि युवक अनुभवहीन और मनमौजी हैं,
इसलिए यह उचित है कि बुज़ुर्ग लोग घर की जिम्मेदारी संभालें,
और युवा लोग, वन के अंधियारे में एकांतवास करें और प्रणय-निवेदन
का अनुशासन सीखें।

-रवींद्रनाथ ठाकुर

 

और अब वह अंग्रेजी कविता, जिसके आधार मैं भावानुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ-

 

It Is Written In The Book!

It is written in the book that Man, when fifty,
must leave the noisy world,
to go to the forest seclusion.
But the poet proclaims
that the forest hermitage is only for the young.
For it is the
birthplace of flowers and the haunt of birds and bees;
and hidden hooks are waiting there for the thrill of lovers’ whispers.

There the moon-light, that is all one kiss for the malati flowers,
Has its deep message, but those who understand it are far below fifty.
And alas, youth is inexperienced and wilful,
therefore it is but meet that the old should take charge of the household,
and the young take to the seclusion of forest shades and the severe
discipline of courting.

 

Rabindranath Tagore

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार।

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