आज हम अपना महान स्वाधीनता दिवस मना रहे हैं। आज से 72 वर्ष पूर्व आज ही के दिन, जिस समय मैं यह ब्लॉग लिख रहा हूँ, उस समय हम तब के हमारे शासकों, अंग्रेजों के विदेशी शासन से मुक्त हुए थे, भारत में आधी रात का समय, मैं उन शासकों के क्षेत्र इंग्लैंड में बैठकर लिख रहा हूँ, यहाँ रात के आठ बजे हैं।

 

भारत के झण्डा गीत की रचना स्व.श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ जी ने की थी। वे कांग्रेस के कार्यकर्ता थे और 7 पद वाले इस मूल गीत से बाद में कांग्रेस नें तीन पद निकाल करके इसे ‘झण्डागीत’ के रूप में मान्यता दी। यह गीत न केवल राष्ट्रीय गीत घोषित हुआ बल्कि अनेक नौजवानों और नवयुवतियों के लिये देश पर मर मिटने हेतु प्रेरणा का स्रोत भी बना।

आज जबकि हम अपनी आजादी का यह महान उत्सव मना रहे हैं, तब यह उचित होगा कि हम अपने स्वतंत्रता संग्राम में अपने प्राणों की बाजी लगाने वाले सेनानियों और स्वतंत्रता के जज़्बे को मुखरित करने वालों को याद करें। मैं अपने उन महान वीरों को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि प्रस्तुत करते हुए, यह अमर झंडा गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ-

 

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा,
झंडा ऊंचा रहे हमारा।
सदा शक्ति बरसाने वाला,
प्रेम सुधा सरसाने वाला,
वीरों को हर्षाने वाला,
मातृभूमि का तन-मन सारा।। झंडा…।

 

स्वतंत्रता के भीषण रण में,
लखकर बढ़े जोश क्षण-क्षण में,
कांपे शत्रु देखकर मन में,
मिट जाए भय संकट सारा।। झंडा…।

 

इस झंडे के नीचे निर्भय,
लें स्वराज्य यह अविचल निश्चय,
बोलें भारत माता की जय,
स्वतंत्रता हो ध्येय हमारा।। झंडा…।

 

आओ! प्यारे वीरो, आओ।
देश-धर्म पर बलि-बलि जाओ,
एक साथ सब मिलकर गाओ,
प्यारा भारत देश हमारा।। झंडा…।

 

इसकी शान न जाने पाए,
चाहे जान भले ही जाए,
विश्व-विजय करके दिखलाएं,
तब होवे प्रण पूर्ण हमारा।। झंडा…।

 

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा,
झंडा ऊंचा रहे हमारा।

 

आप सभी को स्वाधीनता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
नमस्कार।

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