इस वर्ष के लंदन प्रवास का आज अंतिम रविवार था। यह तो निश्चित ही है कि विज़िट करने और कराने वालों में महिलाएं भी हों तो कुछ समय तो शॉपिंग को भी देना ही पड़ता है। वैसे एक-दो बार छिटपुट शॉपिंग पहले भी हो चुकी है, एक दिन तो ‘ओ-2’ में ही लंच और उसके बाद शॉपिंग की गई थी। ‘ओ-2’ जिसे लंदन का आधुनिकतम ईवेंट-प्लेस और शॉपिंग मॉल कह सकते हैं। उसके अलावा अपने घर के पास ही ‘कैनरी व्हार्फ’ स्टेशन के पास अत्याधुनिक मॉल हैं, वे शायद कुछ महंगे तो हैं, वहाँ से भी शॉपिंग की जा चुकी थी। और भी एक-दो विशाल मॉल्स में हम गए थे, जिनमें से एक तो ‘ऑक्सफोर्ड स्ट्रीट’ स्टेशन के पास था, उसका ज़िक्र भी मैंने एक ब्लॉग-पोस्ट में किया है, वहाँ भी भारतीय सामान और भोजन के भरपूर विकल्प मौज़ूद थे।

 

 

आज शॉपिंग को निपटाने के लिएलिए ‘वेस्टफील्ड’ मॉल, एक्ल्स्लूसिव शॉपिंग अभियान को संपन्न करने के लिए चुना गया। यह मॉल ‘स्ट्रैटफोर्ड स्टेशन’ के पास है, जो ‘डीएलआर’ और ‘जुबली लाइन’, दोनो में एक तरफ का अंतिम स्टेशन है, वैसे यहाँ नेशनल रेलवे और एक और लाइन का स्टेशन भी है, इस तरह भारतीय पैमानों से इसे जंक्शन तो कह ही सकते हैं।

 

हाँ तो शॉपिंग में तो मेरी भूमिका शून्य रहती है, मैं यह भी पसंद करता हूँ कि मैं एक स्थान पर बैठकर बाजार को देखता रहूं। खैर रेडीमेड कपड़ों की कुछ दुकानों में मैं गया, तीन-तीन मंज़िलों में और इतने क्षेत्र में फैली दुकानें, जितने में कुछ छोटे-मोटे मॉल पूरे आ जाते हैं। मॉल की विशालता देखकर मुझे ‘दुबई मॉल’ याद आ गया, हालांकि यह उतना बड़ा तो नहीं ही होगा लेकिन भव्यता में कहीं कम नहीं था।

 

 

वैसे मैं यह भी कह दूं कि हमारे भारतवर्ष में भी आज एक से एक सुंदर ‘मॉल’ मौज़ूद हैं। हर देश अपनी संस्कृति, विरासत, शिल्पकला आदि-आदि के साथ अपने बाजारों से भी दुनिया को आकर्षित करता है और मैं समझता हूँ कि बाजार की संस्कृति को भी हमने बहुत अच्छी तरह अपनाया है, और हम इस मामले में भी दुनिया को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।

 

हाँ तो शॉपिंग के बारे में तो मुझे ज्यादा कुछ नहीं कहना है, जो खरीदारों को खरीदना था, उन्होंने खरीद लिया, मेरी स्थिति तो वही थी चचा गालिब के शब्दों में ‘बाज़ार से गुज़रा हूँ, खरीदार नहीं हूँ।

 

हाँ ये जरूर है कि अगर आप बाज़ार को जानते हैं तो आपको अधिकांश प्रमुख जगहों पर भारतीय भोजन का विकल्प भी मिल जाएगा। उस मॉल के ही, ‘फूड कोर्ट’ में हमने एक दुकान देखी जिसका नाम था ‘इंडि-गो’ और वहाँ भारतीय व्यंजनों के अनेक विकल्प दिख रहे थे, जिनमें समोसा चाट, पूरी आदि-आदि अनेक डिश शामिल थीं, शायद और भी दुकानें होंगी, लेकिन हमने वहाँ खाना नहीं खाया।

 

 

हम वहाँ से लौटकर अपने घर के पास वाले स्टेशन ‘कैनरी व्हार्फ’ आए और यहाँ बगल के मॉल में, जिस दुकान पर हमने खाना खाया उसका नाम था- ‘चाय की’ (chai Ki), यहाँ पर हमने सभी भारतीय डिश ऑर्डर कीं और वे बड़ी स्वादिष्ट भी थीं, जिनमें इडली, मलाबर पराठा, पनीर टिक्का आदि शामिल थे।

इसके बाद हम शायद इस पड़ाव की अंतिम आउटिंग के बाद अपने घर लौट आए, जो कुछ फोटो खींच पाया, उनको शेयर करने का प्रयास कर रहा हूँ।

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार।

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