आज महेंद्र कपूर जी का गाया एक गीत शेयर करूंगा और इस बहाने से भी अपने प्रिय गायक मुकेश जी की तारीफ करूंगा।

हाँ तो यह गीत 1967 में रिलीज़ हुई फिल्म- ‘हमराज़’ का है, गीत लिखा है साहिर लुधियानवी जी ने, जो ज़िंदगी में मुसीबतों का सामना हिम्मत के साथ करने का संदेश देता है। इसका संगीत- रवि जी ने दिया था और महेंद्र कपूर जी को शायद पहली बार इस फिल्म में ही गीत गाने का मौका मिला था और उनके गाये इस फिल्म के सभी गीत बहुत लोकप्रिय हुए थे।

 

मेरा इस फिल्म का एक विशेष प्रकार का संबंध बना था। जी हाँ, इस बात का ज़िक्र मैंने पहले भी अपनी ब्लॉग पोस्ट में किया है।  मैं उस समय बेरोज़गार था, मेरी उम्र तब 17 वर्ष की रही होगी और मैंने एक सप्ताह तक इस फिल्म के सभी ‘शो’ देखे थे!

मैं उस समय शाहदरा-दिल्ली में रहता था और गांधी नगर के एक सिनेमा हॉल में जहाँ यह फिल्म चल रही थी, वहाँ डिस्ट्रीब्यूटर की तरफ से मेरी ड्यूटी लगी थी, प्रत्येक शो शुरू होने पर मैं यह देखता था कि प्रत्येक श्रेणी में कितनी सीटें खाली हैं। अब उसके बाद वे लोग इस जानकारी का जो भी इस्तेमाल करते हों। अक्सर लोग गाना शुरू होने पर हॉल से बाहर चले जाते हैं, मैं गाना शुरू होने पर अंदर जाता था।

हाँ तो महेंद्र कपूर जी ने इस फिल्म के गीतों को बहुत सुंदर तरीके से गाया था और इसके लिए उनको फिल्मफेयर एवार्ड भी मिला था। विशेष बात यह थी कि उस समय के किसी स्थापित गायक ने महेंद्र कपूर को यह अवार्ड मिलने पर बधाई नहीं दी।

मुकेश जी जो उस समारोह में उपस्थित नहीं थे, वे अगले दिन बधाई देने के लिए महेंद्र कपूर जी के घर चले गए। महेंद्र कपूर उनको देखकर चकित रह गए और बोले ‘भापे जी आप क्यों आए, मुझे बुला लिया होता!’  ऐसे थे हमारे प्यारे मुकेश जी।

खैर आज के लिए महेंद्र कपूर जी का गाया यह प्यारा सा गीत प्रस्तुत है-

 

न मुँह छुपा के जियो और न सर झुका के जियो
ग़मों का दौर भी आये तो मुस्कुरा के जियो
न मुँह छुपा के जियो, और न सर झुका के जियो।

 

घटा में छुपके सितारे फ़ना नहीं होते,
अँधेरी रात में दिये जला के जियो।
न मुँह छुपा के जियो और न सर झुका के जियो।

 

ये ज़िंदगी किसी मंज़िल पे रुक नहीं सकती,
हर इक मक़ाम से आगे क़दम बढ़ा के जियो,
न मुँह छुपा के जियो और न सर झुका के जियो।

 

न जाने कौन सा पल मौत की अमानत हो,
हर एक पल की खुशी को गले लगा के जियो।
न मुँह छुपा के जियो और न सर झुका के जियो।

 

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार।

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