आज डॉ. बशीर बद्र जी की एक गज़ल याद आ रही है, डॉ. बद्र शायरी में एक्सपेरीमेंट करने के लिए जाने जाते हैं, इस गज़ल में भी उन्होंने कुछ बहुत अच्छे शेर कहे हैं। यह भी जीवन की एक सच्चाई है कि बहुत सी बार जब हम ज़िंदगी में जो कुछ तलाश करते हैं, वही  नहीं मिलता है।

लीजिए आज इस खूबसूरत गज़ल का आनंद लेते हैं-

 

 

मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती ना मिला,
अगर गले नहीं मिलता तो हाथ भी ना मिला।

 

घरों पे नाम थे, नामों के साथ ओहदे थे,
बहुत तलाश किया कोई आदमी ना मिला।

 

तमाम रिश्तों को मैं घर पे छोड आया था,
फिर इसके बाद मुझे कोई अजनबी ना मिला।

 

बहुत अजीब है ये कुरबतों की दूरी भी,
वो मेरे साथ रहा और मुझे कभी ना मिला।

 

खुदा की इतनी बड़ी कायनात में मैंने,
बस एक शख्स को मांगा मुझे वही ना मिला।

 

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार।

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