मुंबई में मेरा संक्षिप्त प्रवास संपन्न हुआ, मैंने आइनॉक्स मेट्रो मल्टीप्लेक्स, मरीन लाइन्स, मुंबई में ‘मूनव्हाइट फिल्म्स इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल’ (MWFIF) 2019 के उद्घाटन समारोह में भाग लेने का ज़िक्र किया था और उस आयोजन की संक्षिप्त रिपोर्ट भी लिखी थी। अब उसके बाद की बात, आइनॉक्स से हम टहलते हुए फैशन स्ट्रीट की तरफ बढ़े, आज़ाद मैदान के पास ही सड़क पर काफी दूरी तक लगे स्टॉल्स वाला यह स्थान जहाँ आपको अपनी पसंद के लेटेस्ट फैशन वाले परिधान और कुछ अन्य शृंगार सामग्री खरीदने का अवसर प्रदान कर्ता है वहीं बहुत लोगों की जी भरकर मोलभाव करने की कामना की भी यहाँ पूर्ति होती है। रोडसाइड शॉपिंग के शौकीन और बाहर से आए लोगों को भी यह बाज़ार काफी आकर्षित करता है, यहाँ लगभग सभी सामान सस्ता मिलने की संभावना रहती है।

 

 

खैर हम तो बाज़ार में से केवल होकर गुज़रे क्योंकि हम खरीदार नहीं थे। फैशन स्ट्रीट से ही हम आगे थोड़ा और टहलते हुए मरीन ड्राइव पहुंच गए जहाँ आसपास के लोग तो शाम के समय टहलने के लिए निकलते हैं और सैलानियों की अच्छी खासी भीड़ यहाँ हर शाम रहती है, विशेष रूप से प्रेमी जोड़ों के लिए और उनके कारण अन्य लोगों के लिए भी यह स्थान बहुत आकर्षण का केंद्र बना रहता है।

 

 

अंधेरा घिरने के साथ ही जहाँ यह सड़क रोशनी से जगमगा जाती है वहीं यहाँ समुद्र के ओवल आकार के सिरों पर, लगभग तीन तरफ जगमगाती रोशनी दिखाई देती है और इस प्रकार जो दृश्य बनता है उसको हम ‘क्वींस नैक्लेस’ के नाम से जानते हैं, क्योंकि यह एक दमकती मणिमाला या कहें कि रंग-बिरंगे मोतियों के हार जैसा लगता है। यहाँ शाम के समय घंटों बैठकर लोग इस दृश्य का आनंद लेते हैं। खैर हमको लौटना भी था सो हम आगे बढ़े मुंबई चर्चगेट स्टेशन की तरफ! पहले हम वीटी स्टेशन से लौटे थे, जब हम गेटवे ऑफ इंडिया गए थे।

 

 

ये दोनों लोकल ट्रेन के टर्मिनल स्टेशन पता नहीं भीड़ का आयात करते हैं या उसका उत्पादन करते हैं। देर रात में जब तक ये लोकल ट्रेन चलती हैं, ऐसा नहीं लगता कि लोगों की संख्या में ज्यादा कमी आई है, ‘पीक आवर्स’ में तो यात्रा करना, और अपना सामान बचाए रखना, अपने आप में एक कलाबाजी का काम है।

 

 

स्टेशन पर ही लोगों के भारी आवागमन के बीच मैंने देखा कि प्लेटफॉर्म आरंभ होने के स्थान पर एक कुता, शू-पॉलिश आदि करने वाले अपने स्वामी की अभयदान करने वाली छत्रछाया में निश्चिंत सो रहा था।

हमने भी अपनी ट्रेन पकड़ी और अंधेरी स्टेशन आए, जहाँ से हम एक बस में कुछ दूर यात्रा करके महालक्ष्मी गुफा के स्टॉप पर पहुंचे, जहाँ उस रोज हमारा रैन बसेरा था।

 

 

मुंबई यात्रा संपन्न करके मैं हैदराबाद की ओर बढ़ गया, यहाँ बहुत कम समय का प्रवास है, देखिए शायद कुछ देखने और शेयर करने का अवसर मिले।

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार।