मुंबई में संक्षिप्त प्रवास के बाद मैं पहुंच गया हैदराबाद में और रात्रि विश्राम के बाद सोचा कि कुछ स्थान देखे जाएं। कुछ जगह तो यहाँ ऐसी हैं जहाँ अवश्य जाना चाहिए, जैसे- रामोजी फिल्म सिटी, लेकिन उसके लिए पूरा दिन चाहिए। अगर टिकट कुछ कम हो और जगह भी पास हो तो इंसान 2-3 बार भी थोड़ा-थोड़ा देखकर आ सकता है, लेकिन 1300 रुपया करीब टिकट में खर्चें तब तो पूरा देखना बनता है न! मैं तो यहाँ 2-3 बार आने पर भी इतना समय नहीं निकाल पाया, लेकिन आप अवश्य जाएं, एक अलग ही अनुभव होगा निश्चित रूप से।

 

 

खैर अब उन स्थानों की बात कर लें जो  मैं देख पाया हूँ, इनमें से कुछ तो दूसरी, कुछ तीसरी बार  भी देखे हैं। जैसे ‘हुसैन सागर लेक’, सिकंदराबाद-हैदराबाद के बीच यात्रा करनी हो तो आप यहाँ से होकर तो  गुज़रेंगे ही, एक और विशेष बात यहाँ की ये कि विवेकानंद जी की एक ही पत्थर से बनी  दिव्य प्रतिमा जब यहाँ लगाई जा रही थी तब वह पानी में गिर गई थी, ऐसा बताया जाता है कि विदेश से मशीन मंगाकर उसे फिर से उठाया गया और आज यह प्रतिमा सरोवर के बीच शान से खड़ी है।

 

 

बिरला मंदिर भी यहाँ का प्रमुख स्थल है, कई मंज़िलों वाला यह बहुत सुंदर मंदिर है, ऊपर से नगर का दृश्य बहुत सुंदर दिखाई देता है, लेकिन यहाँ कैमरा ले जाने की अनुमति नहीं है, हमारे भगवान इतने ‘कैमरा शाई’ है क्या? खैर बिरला मंदिर देखने भी आप अवश्य जा सकते हैं।

 

 

हैदराबाद में आप आएं और सालार-जंग-म्यूज़ियम न देखें तो निश्चित रूप से आपकी  यात्रा अधूरी होगी। यहाँ विभिन्न कला-शैलियों की अनेक स्थानों और ऐतिहासिक काल खंडों की कलाकृतियां, मूर्तियां, पेंटिंग्स आदि संग्रहीत हैं जिनमें अनेक भारतीय और विदेशी कलाकारों ने अपना सर्वश्रेष्ठ सृजन प्रस्तुत किया है। हाँ यहाँ के राजघराने से जुड़ी अनेक वस्तुएं तो हैं ही, जिनमें उनके परिधान, फर्नीचर, हथियार आदि-आदि अनेक दर्शनीय वस्तुएं शामिल  हैं।

 

 

इसके अलावा चारमीनार तो अपने आप में हैदराबाद की पहचान है, पहले भी जब आया हूँ इसको देखा है, इस बार ट्रैफिक से बचने के लिए दूर से ही चारमीनार को देखा।

 

 

इसके बाद हमने निज़ाम के चौमहला प्लेस को देखा जो राजसी शान-औ-शौकत को बखूबी दर्शाता है, यहाँ भी सुंदर फर्नीचर, क्रॉकरी, झाड़-फानूस आदि से लेकर हथियार- बंदूकें, तलवारें इतनी हैं कि वे दीवारों की सज्जा के काम आ रही हैं। वास्तव में जो राजघराने और उससे जुड़ी एवं ऐतिहासिक वस्तुओं के बारे में जानने के इच्छुक हों उनके लिए विशेष रूप से और सभी लोगों के लिए ये दर्शनीय स्थान हैं।

 

 

इनके अलावा- गोल्कुंडा फोर्ट भी यहाँ की प्रमुख ऐतिहासिक धरोहर है, आधुनिक स्थानों में- वंड्रर्ला, स्नो-वर्ल्ड और जल-विहार, लुंबिनी पार्क  आदि आमोद-प्रमोद और मनोरंजन के लिए अच्छे स्थान हैं। ताज फलकनुमा पैलेस भी एक राजसी महल और दर्शनीय स्थान है।

 

 

इसके अलावा यहाँ आर्ट-गैलरी, एम्यूसमेंट पार्कपार्क, चिड़ियाघर आदि हैं, वहीं प्रमुख धार्मिक स्थलों के रूप में यहाँ चिल्कुर बालाजी मंदिर और मक्का मस्ज़िद और इस्कॉन टैम्पल भी शामिल हैं।हैं। ‘सुधा कार म्यूज़ियम’, माउंट ऑपेरा थीम पार्क, उस्मान सागर लेक, निज़ाम का म्यूज़ियम, नागार्जुन सागर डैम, बिरला प्लेनेटोरियम और अनेक आधुनिक मॉल आदि अनेक आकर्षण के केंद्र हैदरबाद-सिकंदराबाद ‘ट्विन-सिटी’ में  अथवा इनके आसपास मौजूद हैं, जिनको देखने में आपके कई  दिन लग सकते हैं। मुझे लगता है कि मैं फिर कभी यहाँ आया तो कुछ अन्य स्थानों के बारे में विस्तार से चर्चा कर सकता हूँ।

 

 

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार।

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