आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य संकलन- ‘PoemHunter.com’ से लेता हूँ। लीजिए पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया उनकी कविता ‘Sit Smiling’ का भावानुवाद-

 

 

गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता

 

मुस्कुराते बैठे रहते हो!

 

मैंने लोगों के बीच शेखी बघारी कि अब मैं तुम्हे जानता हूँ।
वे मेरी सभी कृतियों में तुम्हारे चित्र देखते हैं।
वे आकर पूछते हैं, ”कौन है वह?”
 मैं नहीं जानता कि उनको कैसे उत्तर दूं, लेकिन मैं कहता हूँ,                                                                                                                          ‘बेशक, मैं नहीं बता सकता।“
वे मुझ पर दोष लगाते हैं और घृणापूर्वक चले जाते हैं।
और तुम वहाँ बैठे मुस्कुराते रहते हो।

 

मैं तुमसे संबंधित अपने किस्सों को अमर गीतों में पिरोता हूँ।
रहस्य, मेरे हृदय से अचानक बाहर निकल आता है।
वे आते हैं और मुझसे पूछते हैं, `अपने सभी आशय हमें बताओ।‘
मैं नहीं जानता कि उनको इसका उत्तर कैसे दूं।
मैं कहता हूँ, `अरे, कौन कह सकता है कि उनका अर्थ क्या है!”
वे मुस्कुराते हैं और घोर तिरस्कार के साथ दूर चले जाते हैं।
और तुम वहाँ बैठे मुस्कुराते रहते हो।

 

-रवींद्रनाथ ठाकुर

 

और अब वह अंग्रेजी कविता, जिसके आधार मैं भावानुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ-

 

Sit Smiling

 

I boasted among men that I had known you.
They see your pictures in all works of mine.
They come and ask me, `Who is he?’
I know not how to answer them. I say, `Indeed, I cannot tell.’
They blame me and they go away in scorn.
And you sit there smiling.
I put my tales of you into lasting songs.
The secret gushes out from my heart.
They come and ask me, `Tell me all your meanings.’
I know not how to answer them.
I say, `Ah, who knows what they mean!’
They smile and go away in utter scorn.
And you sit there smiling.

 

Rabindranath Tagore

 

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार।

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