आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य संकलन- ‘PoemHunter.com’ से लेता हूँ। लीजिए पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया उनकी कविता ‘Patience’ का भावानुवाद-

 

 

गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता

 

धैर्य

 

यदि तुम बोलोगे नहीं, मैं अपने हृदय को आपके मौन से भर लूंगा, और उसे सहूंगा।
मैं स्थिर चित्त रहूंगा, और प्रतीक्षा करूंगा, जैसे रात्रि करती है, तारों की सजगता के साथ,
और धैर्य से उसका मस्तक झुका रहरा है।

 

सुबह निश्चित रूप से आएगी, अंधकार दूर हो जाएगा,
और तुम्हारा स्वर, आकाश से फूटती सुनहरी रश्मियों के रूप में उंडेली जाएगी।

 

और फिर तुम्हारे शब्दों को पंख मिल जाएंगे, हमारे हर पक्षी के घौंसले से गूंजते गीतों के रूप में,
और तुम्हारी यह मधुरता, मेरे सभी वनों की पौध में फैल जाएगी।

 

`
-रवींद्रनाथ ठाकुर

 

और अब वह अंग्रेजी कविता, जिसके आधार मैं भावानुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ-

 

Patience

 

If thou speakest not I will fill my heart with thy silence and endure it.
I will keep still and wait like the night with starry vigil
and its head bent low with patience.

 

The morning will surely come, the darkness will vanish,
and thy voice pour down in golden streams breaking through the sky.

 

Then thy words will take wing in songs from every one of my birds’ nests,
and thy melodies will break forth in flowers in all my forest groves.

 

-Rabindranath Tagore

 

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार।

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