आज फिल्म- ‘आनंद’  के लिए मेरे प्रिय गायक मुकेश जी का गाया एक गीत याद आ रहा है, जो आज तक लोगों की ज़ुबान पर है। उस समय राजेश खन्ना जी सुपर स्टार थे और अमिताभ बच्चन के कैरियर को आगे बढ़ाने में इस फिल्म की महत्वपूर्ण भूमिका थी।

योगेश जी के लिखे इस गीत को मुकेश जी ने सलिल चौधरी जी के संगीत निर्देशन में गाया था। आइए इसके बोलों के बहाने मुकेश जी के गाये इस अमर गीत को याद कर लेते हैं-

 

 

कहीं दूर जब दिन ढल जाए,
साँझ की दुल्हन बदन चुराए
चुपके से आए,
मेरे ख़यालों के आँगन में,
कोई सपनों के दीप जलाए।

 

कहीं दूर जब दिन ढल जाए,
साँझ की दुल्हन बदन चुराए
चुपके से आए।
कभी यूँ हीं, जब हुईं, बोझल साँसें,
भर आई बैठे बैठे, जब यूँ ही आँखें,
तभी मचल के, प्यार से चल के,
छुए कोई मुझे पर नज़र न आए, नज़र न आए।

 

कहीं तो ये, दिल कभी, मिल नहीं पाते,
कहीं से निकल आए, जनमों के नाते।
घनी थी उलझन, बैरी अपना मन,
अपना ही होके सहे दर्द पराये।
दिल जाने, मेरे सारे, भेद ये गहरे,
खो गए कैसे मेरे, सपने सुनहरे,
ये मेरे सपने, यही तो हैं अपने,
मुझसे जुदा न होंगे इनके ये साये, इनके ये साये।

 

कहीं दूर जब दिन ढल जाए,
साँझ की दुल्हन बदन चुराए,
चुपके से आए।

 

 

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार।

***