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माँ है रेशम के कारख़ाने में!

अली सरदार जाफरी साहब की एक नज़्म आज शेयर कर रहा हूँ| इस रचना में पिछड़े वर्ग के लोगों की ज़िंदगी का ऐसा चित्रण किया गया है, जिनकी हालत पीढ़ी दर पीढ़ी एक जैसी बनी रहती है, कोई सपने नहीं, […]

इसे दोस्ती नाम क्यों दे दिया!

आज एक बार फिर से मुझे अपने प्रिय गायक मुकेश जी का गाया एक गीत याद आ रहा है| संभव है यह गीत मैंने पहले भी शेयर किया हो| 1956 में रिलीज़ हुई फिल्म- देवर के लिए यह गीत आनंद […]

धैर्य- रवीन्द्रनाथ ठाकुर

आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत […]

आज ये आँचल मुँह क्यों छुपाये!

एक बार फिर से मैं आज अपने सर्वाधिक प्रिय गायक मुकेश जी का गाया एक गीत शेयर कर रहा हूँ| मुकेश जी दर्द भरे गीतों के सरताज माने जाते हैं लेकिन रोमांटिक गीत भी उन्होंने एक से एक अच्छे गाये […]

कोरोना और उसका टीका!

हमारे देश में भी कोरोना की महामारी पिछले 3-4 महीने से कहर बरपा कर रही है और इस समय यह अपने चरम पर है| पहले  हम आंकड़ों की दृष्टि से काफी पीछे थे, लेकिन अब बढ़ते-बढ़ते विश्व में तीसरे नंबर […]

पंछी पिंजरा तोड़ के आजा, देश पराया छोड़ के आजा!

आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट की बारी है –     आज एक खबर कहीं पढ़ी कि उत्तराखंड के किसी गांव में केवल बूढ़े लोग रह गए हैं, विशेष रूप से महिलाएं, जवान लोग रोज़गार के लिए शहरों […]

Mediocrity versus Merit!

Today I am talking about common people, yes- the people who form the majority anywhere and they bring all the changes in the world. It is said that these are middle class, but I would say these are mediocre people. […]

मैं क्या जिया ?

आज डॉ धर्मवीर भारती जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| भारती जी ने कविता, कहानी, उपन्यास आदि सभी विधाओं में अपना बहुमूल्य योगदान किया था| उनकी कुछ रचनाएँ- सूरज का सातवाँ घोडा, अंधा युग, ठंडा लोहा, ठेले पर […]

संसद से राजघाट तक फैले हुए हैं आप!

श्री कुबेर दत्त जी मेरे मित्र रहे थे जब वे संघर्ष कर रहे थे, दूरदर्शन में स्थापित होने से पहले| अत्यंत भावुकतापूर्ण गीत लिखा करते थे, अखबारों में छपने के लिए परिचर्चाएँ किया करते थे| एक परिचर्चा का शीर्षक मुझे […]

मिली हमें अंधी दीवाली, गूँगी होली बाबू जी!

मेरे अग्रजों में से एक डॉ कुँवर बेचैन जी का एक गीत आज शेयर कर रहा हूँ| बेचैन जी उस महानन्द मिशन कॉलेज, गाजियाबाद में प्रोफेसर रहे हैं जहां मैंने कुछ समय अध्ययन किया, यद्यपि मेरे विषय अलग थे| दिल्ली […]

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