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67. इसलिए प्यार को धर्म बना!

आज फिर से पुराने ब्लॉग का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग- (यह पोस्ट मैंने बाबा राम रहीम को सज़ा होने के समय लिखी थी) एक बाबा को सज़ा का ऐलान होने वाला है। अच्छा नहीं लगता […]

यह तो कहो किसके हुए!

आज फिर से एक बार, मेरे प्रिय मंचीय कवियों में से एक स्व. भारत भूषण जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। उनका यह गीत भी मुझे विशेष रूप से प्रिय है, इस गीत में कवियों और विशेष रूप […]

मेरी कब्र के पास खड़े मत रहो, आंसू न बहाओ!

आज मैं विख्यात अमेरिकी कवियित्री मैरी एलिज़बेथ फ्राये की एक  प्रसिद्ध कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के […]

सकल सुमंगल दायक, रघुनायक गुणगान।

लीजिए अब हम गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित महाकाव्य श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड से कुछ अंश प्रस्तुत करने के सिलसिले के समापन की ओर बढ़ रहे हैं। जैसा मैंने पहले भी कहा है, मेरी यह प्रस्तुति मुकेश जी द्वारा गये गए […]

तासु दूत मैं जा करि, हरि आनेहु प्रिय नारि।

गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित महाकाव्य श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड से कुछ अंश प्रस्तुत करने का सिलसिला शायद दो दिन और चलेगा। मैं मुकेश जी द्वारा गये गए अंश में से ही जितना मुझे याद आ रहा है वह मैं यहाँ […]

चकित चितव मुदरी पहिचानी!

गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित महाकाव्य श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड से कुछ अंश प्रस्तुत करने के क्रम में कल हनुमान जी ने लंकिनी से निपटने के बाद उसकी शुभकामनाएं प्राप्त कर ली थीं और इसके बाद उनके लंका में प्रवेश और […]

प्रविसि नगर कीजे सब काजा, हृदय राखि कौशलपुर राजा।

गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित महाकाव्य श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड से कुछ अंश प्रस्तुत करना मैंने शुरू किया जो कम से कम दो-तीन दिन और चलेगा। मैं मुकेश जी द्वारा गये गए भाग में से ही कुछ अंश यहाँ दे रहा […]

राम काज सब करिहऊ, तुम बल-बुद्धि निधान!

अभी दो तीन दिन पहले ही राजनैतिक परिप्रेक्ष्य का संदर्भ देते हुए श्रीरामचरितमानस के सुंदर कांड से कुछ भाग उद्धृत किया था, जिसमें महाबली रावण के अहंकार और विनाशोन्मुख होने को दर्शाया गया था, जब उसको किसी की सलाह अच्छी […]

फूल, मोमबत्तियां, सपने

पुराने कवि-कथाकारों की रचनाएं शेयर करने के क्रम में, मैं आज विख्यात कवि, कथाकार और धर्मयुग पत्रिका के संपादक रहे स्व. डॉ. धर्मवीर भारती जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। यह फूल, मोमबत्तियां और टूटे सपने ये पागल […]

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