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21. रेत के घरौंदों में सीप के बसेरे!

जीवन यात्रा का एक पड़ाव और, एक पुराना ब्लॉग! जयपुर में रहते हुए ही मैंने हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड की एक वैकेंसी देखी, हिंदी अनुवादक के लिए, यह कार्यपालक श्रेणी का पद था, जबकि आकाशवाणी में, मैं पर्यवेक्षकीय स्तर पर था, […]

Violence and Democracy!

Our world has gone through many stages in history. Our country was considered to be the torch bearer of wisdom, a Guru for the world. We never tried to capture the land or the kingdom of others. While there were […]

20. आंचल ही न समाए तो क्या कीजे!

चलिए पुराने पन्ने पलटते हुए, एक क़दम और आगे बढ़ते हैं। आज फिर से जीवन का एक पुराना पृष्ठ, कुछ पुरानी यादें, एक पुराना ब्लॉग! जयपुर पहुंच गए लेकिन काफी कुछ पीछे छूट गया। मेरी मां, जिनके लिए हमारा वह […]

दीवार की मरम्मत!

आज भी मैं विख्यात अंग्रेजी कवि श्री रॉबर्ट फ्रॉस्ट की एक कविता का भावानुवाद और उसके बाद मूल कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ। पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया कविता का भावानुवाद- दीवार की मरम्मत ऐसा कुछ है, जो […]

19. हम खें जुगनिया बनाय गए, अपुन जोगी हो गए राजा!

आज फिर से प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग,जो मेरे लिए अविस्मरणीय है। दिल्ली में सरकारी सेवा के दौरान ही मैंने स्टाफ सेलेक्शन कमीशन की एक और परीक्षा दी, जो हिंदी अनुवादक के पद पर चयन के लिए थी। इस […]

मैं पानी की कलाई हूँ!

कविता के क्षेत्र में जो लोग मेरे लिए गुरुतुल्य रहे हैं, उनमें से एक हैं डॉ. कुंवर बेचैन जी। मैं एक छात्र के रूप में कुछ समय के लिए गाजियाबाद के एम.एम.एच. कालेज भी गया था, मैं तो विज्ञान का […]

सर्दी की रात में सैर !

आज भी मैं विख्यात अंग्रेजी कवि श्री रॉबर्ट फ्रॉस्ट की एक कविता का भावानुवाद और उसके बाद मूल कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ। पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया कविता का भावानुवाद- सर्दी की रात में सैर सर्दियों में […]

This too will pass!

I remember an inspirational story which I read long back. Somebody was given 2 packets, with something in each and was instructed to open first at a time, when he needed help in life and the second one, again when […]

18. ज़िंदगी के हाथों में, कौन सा निवाला है!

चलिए पुराने पन्ने पलटते हुए, एक क़दम और आगे बढ़ते हैं। एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- दिल्ली से जाल समेटने से पहले, कुछ और बातें कर लें। वैसे तो रोज़गार की मज़बूरियां हैं वरना कौन दिल्ली की गलियां छोड़कर जाता […]

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