191 . दुनिया की सैर कर लो!

#SayYesToTheWorld हम हिंदुस्तानी हैं, अपने देश से प्यार करते हैं। लेकिन आज हम पूरी दुनिया में फैले हुए हैं बहुत पहले से, जब यात्रा के साधन इतने अच्छे नहीं थे, तबसे हमारे बहुत से लोग विदेशों में जाकर बसते रहे […]

51. कितने दर्पण तोड़े तुमने, लेकिन दृश्य नहीं बदला है !

आज फिर से पुराने ब्लॉग की बारी है, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग- आज बहादुरी के बारे में थोड़ा विचार करने का मन हो रहा है। जब जेएनयू में, करदाताओं की खून-पसीने की कमाई के बल पर, सब्सिडी […]

190 . और क्या ज़ुर्म है पता भी नहीं!

अभी दो दिन पहले ही ज़िंदगी के बारे में एक ब्लॉग पोस्ट लिखी थी किसी बहाने से, आज फिर खयाल आया कि क्या ज़िंदगी के लिए एक ब्लॉग पोस्ट काफी है! वैसे मैंने पहले भी इस शीर्षक को लेकर लिखा […]

50. टांक लिए भ्रम, गीतों के दाम की तरह !

लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग- आज असहिष्णुता के बारे में बात करने की इच्छा है। ये असहिष्णुता, उस असहिष्णुता की अवधारणा से कुछ अलग है, जिसको लेकर राजनैतिक दल चुनाव से पहले झण्डा उठाते रहे हैं, और अवार्ड […]

189 . ज़िंदगी का कोई इलाज नहीं!

#IndiSpire आज इंडिस्पायर पर सुझाए गए विषय के आधार पर, आलेख लिखने का प्रयास कर रहा हूँ- #MyPhilosophyOfLife सबसे पहले तो निदा फाज़ली साहब की गज़ल के कुछ शेर याद आ रहे हैं- दुनिया जिसे कहते हैं, जादू का खिलौना […]

49. आज मौसम पे तब्सिरा कर लें !

लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग- यह ब्लॉग पिछले वर्ष बरसात के मौसम में लिखा था। कहते हैं कि मौसम पर बात करना सबसे आसान होता है लेकिन जब मौसम अपनी पर आ जाए तब उसको झेलना सबसे मुश्किल […]

188 . संस्मरण के बहाने मगर, याद आने से क्या फायदा!

मैंने जब ब्लॉग लिखना शुरू किया था, तब शुरू के बहुत सारे ब्लॉग अपने जीवन से जोड़कर लिखे थे, जिसमें बहुत से मित्रों और ऐसे लोगों का ज़िक्र किया था, जिनसे जीवन को दिशा मिली, प्रेरणा मिली। यह बात मैं […]

187 . हुआ करे, जो समंदर मेरी तलाश में है!

आज कृष्ण बिहारी ‘नूर’ जी की लिखी एक बहुत प्यारी गज़ल शेयर कर रहा हूँ, इस गज़ल के कुछ शेर जगजीत सिंह जी ने भी गाए थे।  इस गज़ल के कुछ शेर वास्तव में बहुत अच्छे हैं, जैसे- ‘मैं जिसके […]

186 . धूल हूँ मैं, वो पवन बसंती!

आज एक बहुत प्यारा गीत शेयर कर रहा हूँ, जो फिल्म ‘धरती कहे पुकार के’ के लिए मुकेश जी ने गाया था। गीत मजरूह सुल्तानपुरी जी ने लिखा था और इसका संगीत दिया था- लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल जी की जोड़ी ने। एक […]

185. ग़म-ए-हयात से कह दो ख़रीद लाये मुझे!

आज फिर से क़तील शिफाई जी की लिखी एक गज़ल आ रही है, खास तौर पर इसका एक शेर- ‘वो मेरा दोस्त है, सारे जहाँ को है मालूम, दग़ा करे वो किसी से तो शर्म आए मुझे! सचमुच बहुत सुंदर […]

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