फूल, मोमबत्तियां, सपने

पुराने कवि-कथाकारों की रचनाएं शेयर करने के क्रम में, मैं आज विख्यात कवि, कथाकार और धर्मयुग पत्रिका के संपादक रहे स्व. डॉ. धर्मवीर भारती जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। यह फूल, मोमबत्तियां और टूटे सपने ये पागल […]

कौन तुम मेरे हृदय में

हिंदी कविता भी दुनिया के अन्य साहित्य आंदोलनों की तरह अनेक युगों से होते हुए आज की स्थिति तक आई है। एक दौर था हिंदी कविता का जिसे हम छायावाद के नाम से जानते हैं इस युग में जहाँ पंत, […]

66. न था रक़ीब तो आखिर वो नाम किसका था!

आज फिर से पुराने ब्लॉग का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग- आज कुछ गज़लें, कवितायें जो याद आ रही हैं, उनके बहाने बात करूंगा।     एक मेरे दिल्ली पब्लिक लायब्रेरी की शनिवारी सभा के साथी […]

उसने यह निर्णय क्यों लिया – रवींद्रनाथ ठाकुर

आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत […]

अरी ओ एलेक्सा!

अज्ञेय जी की एक पुरानी काव्य-पंक्ति याद आ रही है, जिसमें उन्होंने आत्मा के बारे में उन्होंने लिखा था- अरी ओ आत्मा री, भोली कन्या क्वांरी,  महाशून्य के साथ भांवरें तेरी रची गईं। इस कविता में कवि ने अदृश्य आत्मा के […]

सभा कालवश तोर!

राजनीति में सरकारें बनती रहती हैं, कभी एक पार्टी सत्ता में आती है कभी दूसरी, लेकिन कांग्रेस की आज की स्थिति को देखकर महाभारत और रामायण के प्रसंग याद आते हैं। इन दोनों महाग्रंथों में जो दिखाया गया है, प्रत्येक […]

हरियाली के ऊपर- रवींद्रनाथ ठाकुर

आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत […]

थकी दोपहरी जैसी मां !

आज निदा फाज़ली साहब को याद करने का मन हो रहा है। समकालीन उर्दू शायरी में निदा साहब का अपना एक अलग ही स्थान है। बहुत सादगी के साथ जितनी बड़ी बात वो कह देते थे, वह आसान नहीं होता। […]

कुछ मैं कहूं, कुछ तुम कहो!

अक्सर मुझे हिंदी कवि सम्मेलनों के वे दिन याद आते हैं, जब मंचों से अनेक रचनाधर्मी कवि काव्य-पाठ किया करते थे। मंचों पर हिंदी गीत जमकर सुने जाते थे, कवि सम्मेलन और मुशायरे लाल-किले से लेकर छोट-छोटे कस्बों तक, कितने […]

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