पहले दिन का सूरज- रवींद्रनाथ ठाकुर

आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत […]

जंगल में दूर-दूर हवा का पता न था!

आज ऐसे ही मन हुआ कि अभिव्यक्ति के इस मार्ग से जुड़ी एक गज़ल के बारे में बात कर लें, जिस पर मैं मानता हूँ कि मैं और मुझ जैसे बहुत सारे लोग चलते हैं। एक गज़ल याद आ रही […]

58. वहाँ पैदल ही जाना है…..!

आज फिर से पुराने ब्लॉग का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग- आज ऐसे ही, गीतकार शैलेंद्र जी की याद आ गई। मुझे ये बहुत मुश्किल लगता है कि किसी की जन्मतिथि अथवा पुण्यतिथि का इंतज़ार करूं […]

मौसम ये भारतीय चुनावों का!

बहुत दिनों से तत्कालीन परिवेश पर कोई आलेख नहीं लिखा है। जबकि आजकल दो स्पर्द्धाएं बड़े जोर-शोर से चल रही हैं। एक स्पर्धा में तो युवाओं की विशेष रुचि है, वह है- आईपीएल, जिसमें बहुत से देशों के खिलाड़ी भारत […]

मन की सीमारेखा!

आज ‘रजनीगंधा’ फिल्म के संदर्भ के साथ, मुकेश जी का गाया एक बहुत प्यारा सा गीत याद आ रहा है। यह श्री अमोल पालेकर जी की शुरू कि फिल्मों में से एक थी, जिससे उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई […]

57. जब से गए हैं आप, किसी अजनबी के साथ!

आज फिर से पुराने ब्लॉग का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग- आज एक बार फिर संगीत, विशेष रूप से गज़ल की दुनिया की बात कर लेते हैं। भारतीय उप महाद्वीप में जब गज़ल की बात चलती […]

सोई जानहि जेहि देऊ जनाई!

एक और विषय, जो एक मंच पर ब्लॉग पोस्ट लिखने के लिए दिया गया था। उस विषय के बहाने यहाँ अपने विचार व्यक्त कर रहा हूँ, जिसे कह सकते हैं ‘नॉन पार्टिसिपेटिव एंट्री’। विषय था कोई ऐसा अनुभव जिसको आप […]

अमर प्रेम कथा!

कुछ मंचों पर, साप्ताहिक रूप से जो विषय दिए जाते हैं ब्लॉग में आलेख लिखने के लिए, उनमें से ही इस बार #IndiSpire में यह विषय सुझाया गया था कि लोग अपने क्षेत्र अथवा दुनिया में किसी भी क्षेत्र से […]

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