अंतर्राष्ट्रीय फिल्म उत्सव के अवसर पर पणजी, गोवा में सजावट

  पणजी, गोवा में चल रहे 50 वें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म उत्सव, आईएफएफआई-2019 का आज 28 नवंबर को अंतिम दिन है। ‘IFFI@50’ में फिल्म के शौकीन लोगों को अनेक श्रेष्ठ राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय फिल्में देखने को मिलीं।     इस अवसर […]

गुनगुनाती रही वेदना!

आज फिर से हिंदी काव्य मंचों के एक पुराने लोकप्रिय हस्ताक्षर- स्व. गोपाल सिंह नेपाली जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। गीत स्वयं अपनी बात कहता है, इसलिए मुझे ज्यादा कहने की आवश्यकता नहीं, लीजिए इस गीत का […]

छोड़ जाएंगे ये जहाँ तन्हा!

आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर कर रहा हूँ-     जीवन के जो अनुभव सिद्ध सिद्धांत हैं, वही अक्सर कविता अथवा शायरी में भी आते हैं, लेकिन ऐसा भी होता है कि कवि-शायर अक्सर खुश-फहमी में, बेखुदी […]

कठोर दयालुता- रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता

आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत […]

Talking about facts!

We often add a term ‘factually speaking’ to underline authenticity of what we are saying. But is there anything  which we can highlight as fact!     When we start learning, we are told that there are some universal facts, […]

फिल्म उत्सव, आईएफएफआई-2019 में आज

पणजी, गोवा में चल रहे 50 वें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म उत्सव, आईएफएफआई-2019 में आज 23 नवंबर की खबर यह है कि फिल्म स्टार श्री अनिल कपूर आज कला अकादमी के निकट इंटरएक्टिव डिजिटल एग्जिबिशन ‘IFFI@50’ देखने के लिए गए। प्रस्तुत हैं […]

पणजी में फिल्म मेले- आईएफएफआई-2019 का दूसरा दिन

एक बार फिर से गोवा फिल्म फेस्टिवल, IFFI-2019 के बारे में लिख रहा हूँ, क्योंकि यह मेरा स्थान है और अपने निवास क्षेत्र के बारे में ऐसी गौरव भरी बात लिखना अच्छा लगता है।   जैसा मैंने अपनी पिछली पोस्ट […]

गोवा का वार्षिक अंतर्राष्ट्रीय फिल्म मेला- IFFI 2019

गोवा भारत का एक प्रमुख पर्यटन केंद्र है, जहाँ देश-विदेश से सैलानी आकर्षक समुद्र-तटों को देखने और प्रदूषण मुक्त वातावरण में फुर्सत के कुछ पल बिताने के लिए आते हैं। विशेष रूप से जब देश के अनेक भागों में सर्दी […]

बंगलौर में एक दिन!

हैदराबाद से रात्रि में चलने वाली स्लीपर बस द्वारा बंगलौर आया, बहुत दिनों के बाद नाइट बस में यात्रा और देर रात में मिड-वे ढ़ाबे में खाना खाने का अनुभव दोहराया। एक दिन आराम करने के बाद सोचा कि बंगलौर […]

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