45. हर कोई अपनी ही आवाज़ से कांप उठता है !

लीजिए आज फिर से प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग- (यह ब्लॉग मैंने गुड़गांव से गोआ शिफ्ट होने से पहले लिखा था)। हाँ तो कहाँ जाना है- गोआ! जो एक पर्यटक के रूप में वहाँ गए हैं, उनके मन में […]

178. पुरस्कार के बहाने!

कभी कभी कुछ अलग लिखने का मन करता है, आज इसके लिए मुझे बहाना भी मिल गया क्योंकि ब्लॉग लेखन संबंधी एक एवार्ड के लिए मेरा नॉमिनेशन हो गया। मैंने, सेवानिवृत्ति से पूर्व, 22 वर्ष तक सार्वजनिक क्षेत्र की एक […]

THE VERSATILE BLOGGER AWARD

THE VERSATILE BLOGGER AWARD It was a great surprise for me when today I came to know that sh. Krishna Kumar Lakhotia Ji has nominated me for The Versatile Bloggers Award. Sh. Lakhotia’s blog is titled as “kishanlakhotia(Meditation Now or […]

177. पेपर लीक बनाम स्किल डेवलपमेंट

दिल्ली में सीबीएसई के कुछ पेपर लीक होने की घटना बहुत खेदजनक है और ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। यह प्रवृत्ति बढ़ती ही जा रही है। वर्तमान व्यवस्था के रहते इसमें सुधार की संभावना नजर नहीं आ रही है। […]

44. रोशनी के साथ हंसिए बोलिये!

लीजिए आज फिर से प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग- संक्रमण काल है, सामान जा चुका, अब अपने जाने की बारी है। ऐसे में भी मौका मिलने पर बात तो की जा सकती है। समय है गुड़गांव से गोआ शिफ्ट […]

176. ज़िंदगी काहे को है, ख्वाब है दीवाने का !

आज सोचा कि ज़िंदगी के बारे में बात करके, ज़िंदगी को उपकृत कर दें। शुरू में डॉ. कुंवर बेचैन जी की पंक्तियां याद आ रही हैं, डॉ. बेचैन मेरे लिए गुरू तुल्य रहे हैं और उनकी गीत पंक्तियां अक्सर याद […]

175. लाख यहाँ झोली फैला ले …

आज किशोर दा का गाया एक गीत शेयर कर रहा हूँ, फिल्म-फंटूश से, इसे लिखा है साहिर लुधियानवी जी ने और संगीतकार हैं- सचिन देव बर्मन जी। यही दुनिया है जिसमें हमें रहना होता है, और कहाँ जाएंगे, लेकिन एक […]

43. रात लगी कहने सो जाओ देखो कोई सपना!

आज फिर नया कुछ लिखने का मन नहीं है, ऐसे में सर्वश्रेष्ठ विकल्प यही है, जब तक पुराना माल बाकी हो, कि कोई पुरानी आइटम निकालो और झाड़-पोंछकर प्रस्तुत कर दो। आज भी वही कर रहा हूँ। प्रस्तुत है एक […]

174. जैसे बहते हुए पानी पे हो ‘पानी’ लिखना

डॉ. कुंवर बेचैन जी की गीत पंक्तियां याद आ रही हैं- दिल पे मुश्किल है बहुत, दिल की कहानी लिखना जैसे बहते हुए पानी पे हो, पानी लिखना। बहता हुआ पानी गतिशीलता का, जीवंतता का और सरसता का प्रतीक है। […]

42. एक तो तेरा भोलापन है, एक मेरा दीवानापन!

यादों के समुंदर से एक और मोती, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग! मैंने लखनऊ प्रवास का ज्यादा लंबा ज़िक्र नहीं किया और ऊंचाहार के सात वर्षों को तो लगभग छोड़ ही दिया, क्योंकि मुझे लगा कि जो कुछ […]

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