Tag: BharatBhushan

मिला नहीं कोई भी ऐसा, जिससे अपनी पीर कहूं मैं!

आज फिर से मैं अपने एक अत्यंत प्रिय गीत कवि स्व. भारत भूषण जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। कविता, गीत आदि स्वयं अपनी बात कहते हैं और जितना ज्यादा प्रभावी रूप से कहते हैं, वही उसकी सफलता […]

फिर चाँद उछालेगा पानी, किसकी समुंदरी आँखों में!

आज फिर से मैं अपने एक अत्यंत प्रिय गीत कवि स्व. भारत भूषण जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। वे एक ऐसे गीत कवि थे जिनको सुनने के लालच के कारण बहुत सी बार किसी कवि सम्मेलन में […]

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