Tag: #Ghazal

वो उतनी दूर हो गया जितना क़रीब था!

  आज मैं मुशायरों और कवि सम्मेलनों में ख्याति अर्जित करने वाली शायरा- सुश्री अंजुम रहबर जी की एक गजल शेयर कर रहा हूँ| लीजिए प्रस्तुत है यह सुंदर सी गजल-   मिलना था इत्तिफ़ाक़ बिछड़ना नसीब था, वो उतनी […]

राहें हैं तमाशाई राही भी तमाशाई!

आज विख्यात भारतीय शायर जनाब अली सरदार जाफरी साहब की एक गजल शेयर कर रहा हूँ| जाफरी साहब ने बहुत नायाब शायरी और गीत हम लोगों को दिए हैं| आपके अनेक गीत हिन्दी फिल्मों में सुपरहिट हुए हैं और इस […]

ये क्या हो रहा है ये क्यों हो रहा है- अकबर इलाहाबादी

आज अकबर इलाहाबादी साहब की एक छोटी सी रचना शेयर कर रहा हूँ| अकबर इलाहाबाद साहब ने हल्की-फुलकी और गंभीर, दोनों प्रकार की रचनाएँ लिखी हैं, नेताओं के बारे में भी और मशहूर गजल, ‘हंगामा है क्यों बरपा’ भी अकबर […]

नाव जर्जर ही सही, लहरों से टकराती तो है!

आज एक बार फिर से स्वर्गीय दुष्यंत कुमार जी की एक गजल प्रस्तुत कर रहा हूँ| दुष्यंत कुमार जी हिन्दी के एक श्रेष्ठ कवि थे और आपात्काल मेन लिखे गए उनके गजल संग्रह – ‘साये में धूप’ के लिए विशेष […]

मुझे गिरा के अगर तुम सँभल सको तो चलो !

आज मैं फिर से अपने प्रिय शायरों में से एक स्व. निदा फाज़ली जी की एक गज़ल शेयर कर रहा हूँ। निदा साहब बड़ी सादगी से बहुत बड़ी बात कह देते थे। यह गज़ल को भी उनकी इस अनूठी प्रतिभा […]

उसी के दम से रौनक आपके बंगले में आई है!

आज जनकवि अदम गोंडवी जी की दो कविताएं बिना किसी भूमिका के प्रस्तुत कर रहा हूँ। गज़ल के छंद में उनकी रचनाएं हिंदुस्तान के आम आदमी की परिस्थितियों को, उसकी भावनाओं को अभिव्यक्ति देती थीं। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले […]

शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए!

आज मैं फिर से एक बार दुष्यंत कुमार जी की एक गज़ल शेयर कर रहा हूँ। जैसा कि मैंने पहले भी लिखा है, दुष्यंत कुमार जी आपात्काल में लिखी गई अपनी गज़लों के कारण बहुत प्रसिद्ध हुए थे। मैंने पहले […]

रंग होगा न बदन होगा न चेहरा होगा!

आज मैं साहिर होशियारपुरी जी की लिखी एक गज़ल शेयर कर रहा हूँ, जिसे जगजीत सिंह जी और चित्रा सिंह जी ने बड़े खूबसूरत अंदाज़ में गाया था। यह एक छोटी सी लेकिन बहुत प्यारी गज़ल है, इसका पहला शेर […]

ज़िंदगी तुझको तो, बस ख़्वाब में देखा हमने!

आज एक प्रसिद्ध गज़ल को शेयर कर रहा हूँ, जिसे शहरयार जी ने लिखा था औरऔर इसको 1981 में रिलीज़ हुई फिल्म- उमराव जान के लिए, आशा भौंसले जी ने खय्याम जी के संगीत निर्देशन में गाया था। यह खूबसूरत […]

एक पंछी भी यहाँ शायद नहीं है!

दुष्यंत कुमार जी हिंदी के एक श्रेष्ठ रचनाकार रहे हैं, हिंदी कविता में उनका अच्छा-खासा योगदान है लेकिन आम जनता के बीच उनको विशेष ख्याति उस समय मिली जब उन्होंने आपात्काल में विद्रोह का स्वर गुंजाने वाली गज़लें लिखीं, बाद […]

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