Tag: #Life

Life lessons!

Life- we all live it, with many hopes, we set several targets and are always trying to achieve them. Some people call it a journey, to many destinations which we might fix for ourselves from to time, but we know […]

ऐसा भी तो अंगार नहीं मिलता है – गोपाल दास ‘नीरज’

आज एक बार फिर से मैं हिन्दी के दुलारे गीतकार स्वर्गीय गोपाल दास नीरज जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| नीरज जी अपने जमाने में कवि सम्मेलनों का मुख्य आकर्षण हुआ करते थे| हिन्दी फिल्मों में भी नीरज […]

अब दो आलम में, उजाले ही उजाले होंगे!

आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर कर रहा हूँ- अभिव्यक्ति, कविता, शेर-ओ-शायरी, ये सब ऐसे काम नहीं है कि जब चाहा लिख लिया और उसमें गुणवत्ता भी बनी रहे।     दो शेर याद आ रहे हैं इस […]

Come I may, but go I must!

There is a question, if I have to describe me in just one word, which word could best describe me. Let me try. I have always loved a poem by Gerald Gould- ‘Wander Thirst’. Since my schooling days I loved […]

निंदा, समीक्षा और आलोचना

आज फिर से एक बार पुराना समय याद कर रहा हूँ| पुराने समय को कभी-कभी याद करना बुरा नहीं है, हाँ अतीत में रहना अवश्य बुरी बात है|   हाँ तो बात उस समय की है जब मैं अपने अनेक […]

भीड़ है क़यामत की, फिर भी हम अकेले हैं!

आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर कर रहा हूँ- एक हिंदी फिल्म आई थी गमन, जिसमें ‘शहरयार’ की एक गज़ल का बहुत खूबसूरत इस्तेमाल किया गया था। वैसे यह गज़ल, आजकल की भागदौड़ भरी ज़िंदगी की घुटन, कुंठाओं […]

पर अपने सपनों को पंख कब मिले!

आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर कर रहा हूँ-     बहुत सी बार ऐसा होता है कि कोई कविता शुरू करते हैं, कुछ लाइन लिखकर रुक जाते हैं। फिर आगे नहीं बढ़ पाते, लेकिन वो लाइनें भी […]

Two Yards Of Land!

This life of ours is termed as ‘Mirage’ by many learned people and Saints. We come to this world, we learn, acquire knowledge and skills as per our requirements and capacity and then we wish to get into a service […]

काल-बली बोला मैंने तुझसे बहुतेरे देखे हैं!

आज एक अनुभव शेयर कर रहा हूँ और उस बहाने से जो कुछ बातें मन में आईं, उनके बारे में बात करूंगा। एक बात का खयाल कई बार आता है, बहुत से ऐसे मित्र हैं जो दफ्तर में मेरे साथ […]

अब किसी भी बात पर खुलती नहीं हैं खिड़कियां!

आज शहरयार जी की एक गज़ल के बहाने आज के हालात पर चर्चा कर लेते हैं। इससे पहले दुष्यंत जी के एक शेर को एक बार फिर याद कर लेता हूँ-       इस शहर में वो कोई बारात […]

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