Tag: #RameshRanjak

पेट की पगडंडियों के जाल से आगे!

आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर कर रहा हूँ-     आज क़तील शिफाई जी की एक गज़ल याद आ रही है, क्या निराला अंदाज़ है बात कहने का! शायर महोदय, जिनकी नींद उड़ गई है परेशानियों के […]

केवल कीं नंगी अठखेलियाँ हवा ने!

एक बार फिर से मैं अपने एक प्रिय कवि-नवगीतकार रहे स्व. रमेश रंजक जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ।हूँ। यह गीत रंजक जी के 1969 में प्रकाशित हुए नवगीत संकलन ‘हरापन नहीं टूटेगा’ से लिया गया है। आजकल […]

अपनी भाषा की रोशनी में चलता रहूँ – रमेश रंजक

आज मैं अपने प्रिय कवियों में से एक रहे स्व. रमेश रंजक जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। यह जानकर अच्छा लगता है कि रमेश रन्जक जी से कुछ बार बात करने का, उनके नवगीत सुनने का अवसर […]

अपनी छोटी-सी ज़मीन पर , अपनी उगा फसल!

आज स्व. रमेश रंजक जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ। इस गीत में रंजक जी ने नए कवियों को संबोधित करते हुए यह संदेश दिया है कि वे मौलिकता पर पूरा ध्यान दें। अक्सर यह होता है कि […]

तू भी हुआ रखैल — बदरा पानी दे !

जब स्व. रमेश रंजक जी के दो गीत पहले शेयर किए तो खयाल आया कि गरीब किसान की हालत को लेकर बादल से फरियाद वाला उनका गीत भी शेयर करूं। गरीब किसान का पूरा भविष्य, उसकी खेती पर और उसकी […]

तीस दिन में एक मुट्ठी दाम याद आए!

पिछली बार मैंने स्व. रमेश रंजक जी का एक प्रेम गीत, शेयर किया था, आज उनका एक गीत जो जुझारूपन का, आम आदमी की बेचारगी का, बड़ी सरल भाषा में सजीव चित्रण करता है, कैसे एक आम इंसान के दिन […]

भर-भर आई आँख , ब्याज से पाँच-पचास हुए!

आज मैं अपने प्रिय कवियों में से एक, स्व. रमेश रंजक जी का एक प्यारा सा गीत, बिना किसी भूमिका के शेयर करूंगा।   जितने दूर हुए तुम हमसे उतने पास हुए, दर्द गीत बन गया जिस घड़ी प्राण उदास […]

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