87. आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं झांकी हिंदुस्तान की!

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लीजिए आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट-

2 अक्तूबर को भारत की दो महान विभूतियों की जयंती आती है, एक तो जिन्हें हम राष्ट्रपिता के नाम से जानते हैं और दूसरे भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री जी। इन महापुरुषों की जयंती प्रतिवर्ष देश मनाता है। राजनीति के क्षेत्र से ऐसे अनेक और लोग हैं जिनको ‘भारत रत्न’ का दर्जा दिया गया, मैं आज एक ऐसे ही फिल्मी गीतों के रत्न का ज़िक्र करना चाहूंगा, जो सृजन के क्षेत्र से थे और शायद मेरी सीमित जानकारी के अनुसार एकमात्र फिल्मों से जुड़े कवि हैं, जिन्हें ‘दादा साहब फाल्के’ सम्मान दिया गया।

इनकी लिखी पंक्तियां सुन-सुनकर हम बड़े हुए हैं और हमारे बाद की पीढ़ियां भी काफी हद तक उनको सुनती हैं-

जलियांवाला बाग ये देखो यहाँ चली थीं गोलियां,
ये मत पूछो किसने खेली यहाँ खून की होलियां,
एक तरफ बंदूकें दन-दन एक तरफ थी टोलियां,
मरने वाले बोल रहे थे इंकलाब की बोलियां।
यहाँ लगाई बहनों ने भी बाज़ी अपनी जान की,
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की।
आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं झांकी हिंदुस्तान की॥

उनके कुछ अन्य प्रमुख गीत हैं-

दे दी हमें आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल
साबरमति के संत तूने कर दिया कमाल।

एक और-

हम लाए हैं तूफान से कश्ती निकाल के,
इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के।

एक और गीत जिसे लता जी ने गाया था और चीन से युद्ध के बाद इस गीत को सुनकर नेहरू जी रो पड़े थे, आज भी यह गीत हमें झकझोर जाता है-

ऐ मेरे वतन के लोगो, जरा आंख में भर लो पानी,
जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करो कुर्बानी।
थी खून से लथपथ काया, फिर भी बंदूक उठाकर,
दस-दस को एक ने मारा, फिर गिर गए होश गंवाकर,
जब अंत समय आया तो कह गए कि अब चलते हैं,
खुश रहना देश के प्यारों, अब हम तो सफर करते हैं।

प्रदीप जी की कुछ अन्य अत्यंत लोकप्रिय रचनाएं हैं-

पिंजरे के पंछी रे, तेरा दर्द न जाने कोय’,

‘देख तेरे संसार की हालत, क्या हो गई भगवान’,

‘तुमको तो करोड़ों साल हुए, बतलाओ गगन गंभीर,

इस प्यारी-प्यारी दुनिया में क्यों अलग-अलग तक़दीर’,

‘चल अकेला, चल अकेला, तेरा मेला पीछे छूटा राही, चल अकेला’

‘मैं एक छोटा सा बच्चा हूँ, तुम हो बड़े बलवान, प्रभु जी मेरी लाज रखो’,

‘तूने खूब रचा भगवान, खिलौना माटी का’

मुझे याद है कि जब वाजपेयी जी की सरकार थी, तब कवि प्रदीप जी को दादा साहब फाल्के सम्मान प्रदान किया गया था, कवि प्रदीप इस समारोह में नहीं आ सके थे, तब केंद्रीय मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज उनके घर गई थीं और उनके चरण छूकर उनको यह सम्मान भेंट किया था। कवि प्रदीप वास्तव में इस सम्मान के पात्र थे। इस महान सृजनधर्मी को सादर नमन।

आज अचानक ही इनको याद करने का मन हुआ, वैसे ये पोस्ट पहले, 2 अक्तूबर के दिन पोस्ट की गई थी।

नमस्कार।

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