221. सात बहनें, लंदन की!

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लंदन प्रवास के अंतिम वीकएंड में हमारा प्रोग्राम बना ईस्टबाउंड स्टेशन के आसपास बसे ब्रिटेन के समुद्रतट और वहाँ दूर-दूर तक फैले हरियाली से भरे पहाड़ी‌ क्षेत्र में यात्रा करने का। इस क्षेत्र में ‘लैंसडाउन’ नाम का एक होटल भी दिखा, शायद इस नाम का इलाका भी वहाँ है, ऐसा ही एक क्षेत्र अंग्रेजों ने देहरादून के पास भी विकसित किया था। कुल मिलाकर ब्रिटेन में साउथ का यह इलाका एक सुंदर हिल स्टेशन जैसा है।

लंदन में बस और ट्यूब रेल, लोकल ट्रेन की यात्रा करके हम ‘विक्टोरिया’ स्टेशन पहुंचे, जहाँ से ईस्टबोर्न स्टेशन पहुंचने में लगभग 2 घंटे लगते हैं। ईस्टबोर्न नगर ईस्ट ससेक्स, इंग्लैंड का समुद्रतटीय नगर है। यह नगर इंग्लैंड के दक्षिण पूर्वी समुद्र तट पर बसा एक रिज़ॉर्ट नगर है। समुद्र तट पर अनेक आकर्षक विक्टोरियन होटल हैं। 19 वीं सदी में बना ईस्टबोर्न पियर (तटबंध) है, जहाँ से समुद्र का दृश्य बहुत आकर्षक लगता है और वहाँ बहुत सारे रंगबिरंगे पक्षी भी मंडराते रहते हैं। यहाँ बहुत से ऐतिहासिक स्थान भी हैं, जिनको अधिक रुकने पर देखा जा सकता है, लेकिन हमारा उद्देश्य तो एक दिन की यात्रा में प्रकृति की सुंदर छवियों को देखना ही था।

हाँ तो स्टेशन पर उतरने के बाद हम ‘हॉप ऑन’ बस में छत पर बैठे जहाँ से हम चारों तरफ के मनोरम दृश्य को देख रहे थे, बस में कमेन्ट्री भी चल रही थी जिसमें आसपास के सुंदर दृश्यों, इमारतों आदि के बारे में बताया जा रहा था। मुझे यह मानने में कोई संकोच नहीं है कि यहाँ जिस प्रकार से अंग्रेजी कमेंट्री की जाती है, उसका बहुत कम हिस्सा मैं समझ पाता हूँ।

बस में बैठकर जिन दृश्यों को हमने देखा उनमें दूर-दूर तक फैली हरियाली पहाड़ियां शामिल थीं, जिनकी सुंदरता केवल महसूस की जा सकती है। एक बात और ब्रिटेन में लोग पैदल चलने और दौड़ने के दीवाने हैं। जिन दूर-दूर तक फैली, एक दूसरे से जुड़ी हरियाली पहाड़ियों को हम बस से, देख रहे थे, उन पर पैदल चल रहे लोगों की पंक्तियां भी दूर से ऐसे लग रही थीं जैसे अपने भारत में हम चींटियों की पंक्ति को देखते हैं। (वैसे यहाँ आने के बाद तो मैं चींटियों को नहीं देख पाया हूँ)। आसपास के दृश्यों में 1902 में बना एक लाइटहाउस भी शामिल था।

खैर इस बस से हम ‘बीची हैड’ पर उतरे, जो सैलानियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए बहुत बड़ा आकर्षण का केंद्र है। यहाँ बर्लिंग गैप्स में आप ‘सेवन सिस्टर्स’ का आकर्षक नज़ारा देख सकते हैं। असल में यहाँ ‘चॉक’ की सीधी खड़ी चट्टानें (क्लिफ) हैं, जैसी कि अधिकतर नदियों अथवा समुद्र के किनारे देखने को मिलती हैं। जैसे जबलपुर के भेड़ाघाट में संगमरमर की चट्टानें हैं, वैसे ही, जैसे एक सीधी पहाड़ी ‘चॉक’ की चलती जा रही हो, जिसमें सात चोटियां हैं। इसलिए इसका नाम ‘सेवन सिस्टर्स’ रखा गया है।

यहाँ पर समुद्र का पानी भी नीला, हरा कई रंगों का और बहुत आकर्षक है। समुद्र में डुबकी लगाने का यहाँ के लोग और उनके कुत्ते भी भरपूर आनंद लेते हैं। एक विशेषता है कि यहाँ लोग कुत्तों को हर जगह साथ लेकर जाते हैं। और हाँ आप यहाँ अंग्रेज पुरुषों एवं महिलाओं को दूर-दूर तक ‘सन बाथ’ लेते हुए भी देख सकते हैं।

सेवन सिस्टर्स की शरण में काफी समय बिताने, भोजन करने के बाद हम वापस बस में बैठे, फिर से सुंदर नजारों को देखा और फिर वापसी में ‘ईस्टबोर्न पियर’ पर आ गए, यह तट से काफी दूर अंदर तक, समुद्र पर बना एक सुंदर संगमरमर जैसा ऊंचा चबूतरा है, जिसके ऊपर लोगों के बैठने, आराम करने आदि की व्यवस्था है, होटल, गेम्स आदि हैं और लोग वहाँ से भी समुद्र और प्रकृतिक दृश्यों को अपने कैमरे में कैद कर सकते हैं।

कुछ समय वहाँ बिताने के बाद हम शाम के समय टहलते हुए स्टेशन की तरफ बढ़े और लंदन के लिए अपनी वापसी यात्रा प्रारंभ की।

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार।