आज मैं अपने सभी साथियों के साथ एक अलग प्रकार के अनुभव को साझा करूंगा, जो एक लंबे समय के बाद एक औद्योगिक प्रतिष्ठान में जाने का अनुभव है। काफी समय तक मैं एक प्रतिष्ठित संस्थान एनटीपीसी से जुड़ा रहा, रिटायर होने के काफी समय बाद यह नया अनुभव बहुत अच्छा लगा। यह अनुभव है बंगलौर के निकट, तमिलनाडु की सीमा में स्थित टीवीएस फैक्ट्री में टीवीएस जुपिटर की निर्माण प्रक्रिया से अवगत होने का अनुभव।

 

टीवीएस जुपिटर के एक विज्ञापन में सदी के महानायक अमिताभ बच्चन, घर मे टीवीएस जुपिटर आने पर गुरू अर्थात वृहस्पति के आने की बात कहते हैं क्योंकि जुपिटर का वही अर्थ है, और इस प्रकार हम इसे वृहस्पति वाहन भी कह सकते हैं।  हम कुछ ब्लॉगर साथी गए बंगलौर के पास टीवीएस फैक्ट्री में, जो ‘होज़र’ में, तमिलनाडु की सीमा में पड़ती है, बल्कि वहीं से तमिलनाडु की सीमा शुरू होती है।

मैंने अपनी पिछली ब्लॉग पोस्ट में यह बताया था कि मैं बंगलौर में हूँ, आज बताता हूँ कि बंगलौर आने का कार्यक्रम कैसे बना और वहाँ क्या हुआ।

दरअसल अचानक यह संदेश मिला कि इंडिब्लॉगर और टीवीएस जुपिटर की ओर से कुछ ब्लॉगरों को बंगलौर के पास ‘होज़र’ में स्थित टीवीएस फैक्ट्री में आमंत्रित किया गया है। कुल मिलाकर 8 ब्लॉगर, हिंदी में लिखने वाले शायद 5 ब्लॉगर और तेलुगु और तमिल भाषाओं के अन्य्य ब्लॉगरों को आमंत्रित किया गया था।

यह जानकर बहुत अच्छा लगा कि ब्लॉगर्स के सजग ब्लॉगिंग कर्म को महत्व दिया गया और विशेष रूप से, हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं को समुचित महत्व दिया गया।


खैर निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बंगलौर में ट्रैफिक की निकृष्ट स्थिति से दो-चार होते हुए, हम कुछ देरी से सही, टीवीएस फैक्ट्री में पहुंचे। इस यात्रा के आयोजन का उद्देश्य मैं समझ सकता हूँ कि उस मेहनत से अवगत कराना है, जो टीवीएस जुपिटर स्कूटर को अधिक से अधिक उपयोगी बनाने के लिए की गई है।

मुझे याद है कि एक ज़माना था जब दुपहिया वाहन के नाम पर स्कूटर का ही ध्यान आता था, फिर जाहिर है कि कुछ विशेष सुविधाओं और शायद अधिक स्मार्ट लगने के कारण मोटरसाइकिल ज्यादा पसंद की जाने लगी। क्योंकि दुपहिया वाहन विशेष रूप से मनुष्य की पर्सनेलिटी का एक हिस्सा बन जाता है। इसका एक कारण अधिक माइलेज देना भी था।

टीवीएस फैक्टरी में मोटरसाइकिल और अन्य ब्रांड भी तैयार किए जाते हैं, लेकिन हम लोग क्योंकि टीवीएस जुपिटर के लिए वहाँ गए थे, इसलिए उसके बारे में ही बात करूंगा।

मैं यह भी बताना चाहूंगा कि इस फैक्टरी भ्रमण के दौरान हमें वह शानदार काम देखने को मिला, जो टीवीएस फैक्ट्री में, टीवीएस जुपिटर को तैयार करने के लिए किया जाता है। संक्षेप में कहना चाहूंगा कि, रोबोट्स द्वारा मशीनिंग का, इंजन एसेंबली का और उसके बाद समूचे स्कूटर के एसेंबल होने और फिर रोबोट्स और मनुष्यों द्वारा स्कूटर को पेंट करने का काम अत्यंत प्रभावशाली लगा। यह भी जानकर बहुत अच्छा लगा कि फैक्टरी में काफी बड़ी संख्या में महिलाएं काम करती हैं। हम लोगों का जिन प्रतिनिधियों से संवाद हुआ उनमें में भी काफी बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल थीं।

इसके अलावा यह जानकर भी अच्छा लगा कि वहाँ हर एक मिनट में दो टीवीएस जुपिटर स्कूटर तैयार होते हैं।

जैसे कहा जाता है, कोई एक बात इंसान को पूरी खुशी नहीं देती, लेकिन छोटी-छोटी खुशियां मिलकर ही बड़ी खुशी बन जाती है। इसी प्रकार हर उद्योग जो कोई उत्पाद तैयार करता है, उपभोक्ताओं के लिए, उसका यह प्रयास होता है कि उपभोक्ताओं की जो अपेक्षाएं उस उत्पाद से हैं, उनको किस प्रकार अधिक से अधिक पूरा किया जाए।
वैसे तो सभी उद्योग अपने यहाँ अनुसंधान और विकास गतिविधियां चलाते हैं, महत्वपूर्ण यह है कि कौन उपभोक्ता की ज़रूरतों को किस हद तक समझ पाता है और क्या समाधान उन अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए करता है।

मैं उस टैग लाइन को दोहराना चाहूंगा जो टीवीएस जुपिटर के विज्ञापनों में अक्सर दोहरायी जाती है- ‘ज्यादा का फायदा’। इस ज्यादा फायदे में बहुत से छोटे-छोटे सुधार, छोटी-छोटी सुविधाएं शामिल होती हैं, जिनमें कहीं स्टील के स्थान पर प्लास्टिक का इस्तेमाल भी शामिल है, इसी तरह अलग-अलग मनभावन रंगों में स्कूटर उपलब्ध कराना भी शामिल है।


यहाँ मैं टीवीएस जुपिटर की कुछ विशेष उपलब्धियों का उल्लेख करना चाहूंगा, जो किसी को भी प्रभावित कर सकती हैं-

• वर्ष 2013 में बाज़ार में लाया गया जुपिटर स्कूटर आज टीवीएस मोटर कंपनी की पहचान बन गया है।
• बहुत कम समय में यह ब्रांड भारत में नं 2 स्कूटर बन गया है।
• इस ब्रांड का प्रचार, महानायक अमिताभ बच्चन करते हैं, इसमें यह संदेश भी निहित है कि इसको चलाने के लिए युवा होना भी आवश्यक नहीं है।
• निरंतर इसमें दी गई सुविधाओं, इसके लुक, मनभावन रंगों में इसकी प्रस्तुति के द्वारा, इसे इसके प्रचार की टैग लाइन ‘ज्यादा का फायदा’ के अनुरूप बनाया गया है।
• बाजार में उतरने के बाद 30 महीनों में ही 10 लाख का आंकडा छूकर, यह देश में सबसे तेजी से आगे बढ़ा स्कूटर बन गया था।
• वर्ष 2017 में इसने 20 लाख स्कूटर बिक्री का स्तर प्राप्त कर लिया था और आज इसके 25 लाख संतुष्ट ग्राहक हैं।
• हाल ही में टीवीएस जुपिटर को जे.डी.पॉवर 2018 टू व्हीलर ऑटोमोटिव प्रोडक्ट एक्ज़ीक्यूशन एंड ले-आउट स्टडी के आधार पर ‘मोस्ट अपीलिंग एग्जीक्यूटिव स्कूटर’ के रूप में सम्मानित किया गया।
आइए अब इसकी कुछ विशेषताओं के बारे में बात कर लेते हैं-

• टीवीएस जुपिटर में सिंगल सिलिंडर, फोर स्ट्रोक, 110 सीसी इंजन है और यह 7500 रोटेशन प्रति मिनट के साथ 5.88 किलोवाट (7.88 बीएचपी) उपलब्ध कराता है।
• यह स्कूटर 11.2 सेकंड में 0 से 60 कि.मी.प्र.घंटे का पिक-अप प्राप्त कर लेता है।
• इसमें इकोनोमीटर है और इसकी ईंधन सक्षमता (फ्युअल एफिशिएंसी) 62 कि.मी.प्रति लीटर है।
• इसके अलावा, इसमें अधिक ‘लेग स्पेस’, टेलीस्कोपिक सस्पेंशन और सीट के नीचे सामान रखने की ज्याद जगह और बाहर से ईंधन भरने की सुविधा की भी जानकारी दी जाती है।
• जो बात मुझ जैसे सामान्य व्यक्ति को आकर्षित करती है, वह यह भी है कि यह स्कूटर 8 आकर्षक रंगों में मिलता है और हर व्यक्ति अपनी पसंद के अनुसार रंग चुन सकता है।

टीवीएस जुपिटर क्लासिक में विशेष रूप से शानदार फुल क्रोम मिरर, मनमोहक विंडशील्ड, पीछे बैठने वाली सवारी के लिए गद्दीयुक्त बैकरेस्ट, स्मार्ट यूएसबी चार्जर शामिल है-जिसके द्वारा जब आप स्कूटर चला रहे हैं तभी साथ-साथ आपका मोबाइल भी चार्ज होता रहता है।

मैंने यहाँ कुछ विशेषताओं का ज़िक्र किया, लेकिन जैसा कहा जाता है- हलवे का स्वाद तो उसको खाने से ही मिलता है, इस भ्रमण के द्वारा वहाँ के अधिकारियों द्वारा ‘जुपिटर’ के बारे में जानकारी दिए जाने और फैक्टरी में उत्पादन की अत्यंत प्रभावशाली प्रक्रिया के बाद ‘टेस्ट राइड’ भी आयोजित की गई थी, जिसमें काफी लंबे राइडिंग ट्रैक पर ब्लॉगर साथियों ने राइड करके देखा और उनका मन हो रहा था कि यह राइड आगे भी चलता ही जाए!


मैं समझता हूँ कि टीवीएस का यह उत्पाद निश्चित रूप से आकर्षक और उपयोगी है और जो स्कूटर खरीदने का विचार कर रहे हों उनको निश्चित रूप से एक बार इस विकल्प पर भी विचार कर लेना चाहिए।

हम ब्लॉगर साथियों की टीवीएस फैकट्री यात्रा से संबंधित एक

एक सामूहिक चित्र यहाँ दे रहा हूँ, जिसमें 8 ब्लॉगर साथी और टीवीएस कंपनी के संबंधित अधिकारी एक साथ हैं-

कुल मिलाकर यह एक अविस्मरणीय अनुभव था, जिसमें हिंदी और कुछ अन्य भारतीय भाषाओं के ब्लॉगरों ने टीवीएस फैक्ट्री, होज़र में टीवीएस जुपिटर की निर्माण प्रक्रिया को पास से देखा, उसके बारे में वहाँ के अधिकारियों से जानकारी ली और फिर उस जानकारी और अनुभव को अपने ब्लॉग्स में अभिव्यक्त किया।

इस उत्पाद के बार में आप यहाँ से भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं-

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अंत में मैं एक बार फिर से इंडीब्लॉगर और टीवीएस कंपनी के सभी संबंधित लोगों को धन्यवाद देता हूँ कि उन्होंने इस शानदार उत्पाद और इसके उत्पादन और निरंतर सुधार से जुड़ी प्रक्रिया को निकट से देखने का अवसर प्रदान किया।

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नमस्कार।