अभी कुछ दिन पहले ही मैंने अपनी एक ब्लॉग पोस्ट में लिखा था कि किस प्रकार मेरी एक प्रायोजित यात्रा में कुछ ऐसे ब्लॉगर साथियों से मुलाक़ात हुई जो ब्लॉग लेखन के माध्यम से अच्छी कमाई कर रहे हैं।

अभी मैंने पाया कि #IndiSpire में इस विषय पर चर्चा हो रही है कि क्या धन कमाना, ब्लॉग लेखन का मुख्य लक्ष्य होना चाहिए!

कुछ पीछे जाना पड़ेगा, हम लोग शुरू के दिनों में कविता लिखा करते थे, तब मैं दिल्ली में था, कुछ साथी ऐसे मंचों पर भी जाते थे, जहाँ पैसे मिलते हैं और हम अधिकतर लोग ऐसी गोष्ठियों में जाया करते थे, जिनमें मुख्यतः कवि लोग आया करते थे और वे एक दूसरे की कविताओं की सराहना और समीक्षा किया करते थे।

जब आप जनता के बीच जाते हैं, जहाँ जाने के लिए आपको पैसे मिलते हैं, तब आप बाजार के बीच जाते हैं, तब जो कुछ जो आप परोस रहे हैं, वह माल है! उसको स्वीकार या अस्वीकार करना जनता के, ग्राहकों के हाथ में है।

और अगर जनता पर फैसला छोड़ दिया जाए, तो वे क्या पसंद करते हैं, सब जानते हैं! मुझे एक ही नाम याद आता है- सुरेंद्र शर्मा, वो चुटकुले बहुत सुंदर सुनाते हैं, लेकिन वो उनके ओरिजिनल नहीं होते, और वो कविता तो एकदम नहीं होते! और वो खूब चलते हैं और सबसे ज्यादा पैसा कमाने वाले कवियों? में शामिल हैं।

मुझे याद है किसी जमाने में हमने श्रेष्ठ कवि श्री रमानाथ अवस्थी जी को भी कविता-पाठ करते हुए सुना है। एक-दो बार ऐसा हुआ कि जनता ने उनको हूट कर दिया, फिर उन्होंने लंबा भाषण दिया, कहा कि मैं कोशिश करूंगा कि मैं आपके बीच न आऊं, मेरी कविता आपके पास आए! उसके बाद जब उन्होंने गीत पढ़ा तो हर पंक्ति पर ताली बजने लगी!

ब्लॉगिंग में तो खैर हम उस तरह से पब्लिक के सामने नहीं जाते, वैसे भी पढ़ने वाले माध्यम में हर कोई, एक-एक शब्द को अपने स्तर पर परखता है। भीड़ के बीच अक्सर ऐसे लोग हावी हो जाते हैं, जो सुरुचि संपन्न नहीं होते और हूटिंग में एक्सपर्ट होते हैं।

फिर से काव्य-मंच का उदाहरण याद आ रहा है। हमारे सीनियर कवि हैं- श्री देवेंद्र शर्मा ‘इंद्र’ जी, नवगीत में उन्होंने अनेक श्रेष्ठ रचनाएं दी हैं। वे कविता-पाठ का पैसा नहीं लेते। कहते हैं कि कविता तो मेरी बेटी है, उसको नहीं बेचूंगा!

दूसरी तरफ एक कवि हैं- डॉ. कुमार विश्वास, उन्होंने कितने मानदेय से शुरू किया था मैं जानता हूँ, लेकिन आज वे पूरी दुनिया घूम रहे हैं और कितना मानदेय ले सकते हैं उसकी कोई सीमा नहीं, खैर एक बात अच्छी लगती है कि एक अच्छा रचनाकार, कविता के नाम पर चुटकुले सुनाने वालों का मुक़ाबला कर रहा है।

इधर-उधर भटकने के बाद, फिर से मूल जगह पर आता हूँ, ब्लॉगिंग करने से अगर पैसे मिलते हैं तो उसमें क्या बुराई है, बस इस कर्म में जो बात आप लोगों तक पहुंचा रहे हैं वह पूरी निष्ठा, ईमानदारी और सृजनशीलता के साथ पहुंचाई जाए।

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार।

IndiBlogger  # IndiSpire   #EarnThroughBlogging