आज भी मैं विख्यात अंग्रेजी कवि जॉन कीट्स की अंग्रेजी भाषा में लिखी गई एक और कविता का भावानुवाद और उसके बाद मूल अंग्रेजी कविता प्रस्तुत करने का प्रयास करूंगा। आज के लिए पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया कविता का भावानुवाद-

 

जॉन कीट्स

कहाँ है कवि ?

कहाँ है कवि? उसे दिखाओ, उसे दिखाओ,  
नौ रस, नौ काव्य-शक्तियां! जिनसे मैं उसे जान सकूं।
यह व्यक्ति, जो एक आम इंसान होने के साथ ही,
सबके समान है, चाहे वह राजा हो,
अथवा भिखारियों की श्रेणी में सबसे गरीब हो,
अथवा कोई भी आश्चर्यजनक स्थिति,
एक ऐसा व्यक्ति, आदिम व्यक्ति और दार्शनिक प्लैटो- ;
दोनो हो सकता हो;

ऐसा है यह व्यक्ति जो किसी भी पक्षी,
वह गौरैया हो या गरुड, उनके साथ उड़कर पहुंच सकता है
उन सभी मूल मनोभावों तक; जिनके बारे में सुना है  
जैसे शेर की दहाड़, और बता सकता है
कि उसका कठोर कंठ क्या अभिव्यक्त करता है,
और उसको कैसा लगता है, बाघ का चिल्लाना,  
आओ, तैयारी करो और अभिव्यक्त करो,
उसके कानों के लिए, मातृ-भाषा की  तरह।

और अब वह अंग्रेजी कविता, जिसके आधार मैं भावानुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ- 

 

John Keats

 Where’s The Poet?

Where’s the Poet? show him! show him,
Muses nine! that I may know him.
‘Tis the man who with a man
Is an equal, be he King,
Or poorest of the beggar-clan
Or any other wonderous thing
A man may be ‘twixt ape and Plato;
‘Tis the man who with a bird,
Wren or Eagle, finds his way to
All its instincts; he hath heard
The Lion’s roaring, and can tell
What his horny throat expresseth,
And to him the Tiger’s yell
Come articulate and presseth
Or his ear like mother-tongue. 

नमस्कार।

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