आज मैं भारत के नोबल पुरस्कार कवि  गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। लीजिए पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया उनकी कविता दा मर्चेंटका भावानुवाद-

 

गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता 

व्यापारी

 

कल्पना करो मां, कि तुम घर पर रहती हो और मैं यात्रा करता हूँ,
अजाने प्रदेशों की। 

कल्पना करो कि मेरी नाव तैयार है, रवाना होने को, पूरी तरह सामान से लदी हुई।
अब ठीक से सोचो मां, इससे पहले कि तुम मुझसे कहो, कि मैं वापस आते समय
तुम्हारे लिए क्या लेकर आऊं।

मां, क्या तुम चाहती हो सोने की अनेकों ढेरियां?
वहाँ, सुनहरी धाराओं के किनारों पर, खेत
सुनहरी फसलों से भरे पड़े हैं।

और वन-मार्ग के छायादार रास्तों में, सुनहरे चंपा के फूल
भूमि पर गिरते रहते हैं। 

मैं उनको सैंकड़ों टोकरियों में भरकर तुम्हारे लिए लाऊंगा। 
मां, क्या तुम पतझड़ में गिरने वाली बूंदों जैसे बड़े-बड़े मोती पाना चाहती हो?

मैं मोतियों वाले द्वीप का किनारा पार करूंगा,.
वहाँ प्रभात के समय, घास मैदान में फूलों पर, हल्के से मोती कंपकपाते हैं
ये मोती घास पर गिर जाते हैं, और मोती बिखरे रहते हैं,
समुद्र की बेकाबू लहरों के निकट, रेत में छितराए हुए।
मेरा भाई के पास, एक जोड़ी पंख वाले घोड़े होंगे,
उड़ने के लिए-. बादलों के बीच। 

पिताजी के लिए मैं ऐसी जादुई कलम लाऊंगा, जो स्वयं ही लिखेगी।
और तुम्हारे लिए मां, मुझे अवश्य लानी चाहिए, गहनों की ऐसी संदूकची, 
जिसकी कीमत, सात राजाओं को अपना राजपाट देकर चुकानी पड़े।

 

और अब वह अंग्रेजी कविता, जिसके आधार मैं भावानुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ- 

The Merchant

Rabindranath Tagore

Imagine, mother, that you are to stay at home and I am to travel into strange lands.
Imagine that my boat is ready at the landing fully laden.
Now think well, mother, before you say what I shall bring for
you when I come back.
Mother, do you want heaps and heaps of gold?
There, by the banks of golden streams, fields are full of
golden harvest.
And in the shade of the forest path the golden champ flower
drop on the ground.

I will gather them all for you in many hundred baskets.
Mother, do you want pearls big as the raindrops of autumn?
I shall cross to the pearl island shore.
There in the early morning light pearls tremble on the meadow
flowers, pearls drop on the grass, and pearls are scattered on the
sand in spray by the wild sea-waves.
My brother shall have a pair of horses with wings to fly among
the clouds.
For father I shall bring a magic pen that, without his
knowing, will write of itself.
For you, mother, I must have the casket and jewel that cost
seven kings their kingdom.

 

नमस्कार।

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