आज मुकेश जी का गाया एक बहुत सुंदर गीत याद आ रहा है, राज कपूर साहब द्वारा अभिनीत इस फिल्म- ‘फिर सुबह होगी’ का यह गीत साहिर लुधियानवी जी ने लिखा है और इसे मुकेश जी ने खय्याम साहब के संगीत में गाया है।

असल में यह गीत आज के हालात पर बहुत सुंदर व्यंग्य है, गीत में कुछ ऐसा कहा गया है कि भगवान आजकल इस दुनिया की तरफ देख ही नहीं रहा है और फिर यह भी कि इतना फैल चुकी इस दुनिया को सुधारने के लिए भगवान के पास पर्याप्त मानव-बल नहीं है, इसलिए लोग स्वयं ही अपने तरीके से अपनी समस्याओं को हल कर रहे हैं।

 

लीजिए इस गीत का आनंद लेते हैं-

 

आसमां पे है खुदा और जमीं पे हम,
आज कल वो इस तरफ देखता है कम,
आसमां पे है खुदा और जमीं पे हम।

 

आजकल किसी को वो टोकता नहीं,
चाहे कुछ भी कीजिये रोकता नहीं,
हो रही है लूटमार फट रहें हैं बम।
आसमां पे है खुदा और जमीं पे हम,
आज कल इस तरफ देखता है कम।

 

किसको भेजे वो यहाँ खाक छानने,
इस तमाम भीड़ का हाल जानने,
आदमी हैं अनगिनत देवता हैं कम।
आसमां पे है खुदा और जमीं पे हम,
आज कल इस तरफ देखता है कम।

 

जो भी है वो ठीक है फिक़्र क्यों करे,
हम ही सब जहान की फ़िक्र क्यों करें,
जब तुम्हे ही गम नहीं तो क्यों हमें हो गम।
आसमां पे है खुदा और जमीं पे हम,
आज कल इस तरफ देखता है कम।

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार।

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